बैंक की कतार से QR कोड तक: बाढ़ प्रभावित नेपाल में बदला दान देने का तरीका, राहत कोष में पहुंचा अरबों का फंड

Edited By Updated: 06 Sep, 2026 06:30 PM

from bank queues to qr codes flood hit nepal s digital shift in philanthropy

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत राशि जुटाने का तरीका तेजी से डिजिटल हुआ है। लोग QR कोड, मोबाइल बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय कार्ड के जरिए सीधे सरकारी राहत कोष में पैसा भेज रहे हैं। 11 दिनों में 10 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा जुटे। UPI और Alipay से भी...

Kathmandu: नेपाल में पहले सरकारी राहत कोष में दान देने के लिए लोगों को नकदी लेकर बैंक जाना और कतार में खड़ा होना पड़ता था लेकिन अब लोग मोबाइल फोन पर एक क्लिक के जरिए और क्यूआर कोड स्कैन करके आसानी से दान करने में सक्षम हैं। 'मंगोलियन हार्ट' बैंड के गिटारवादक बॉबी लामा के लिए यह बदलाव व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा है। द काठमांडू पोस्ट' अखबार के अनुसार, लामा 2015 में आए भूकंप एवं कोविड-19 महामारी के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों से जुड़े थे और जरूरतमंद समुदायों तक खुद नकदी लेकर जाते थे। बैंक जाने के झंझट के कारण उन्होंने तब सरकारी राहत कोष में दान देने के बारे में कभी नहीं सोचा लेकिन इस बार नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद उन्होंने बस एक क्यूआर कोड स्कैन किया और मोबाइल बैंकिंग के जरिये सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में राशि भेज दी। लामा का अनुभव यह दिखाता है कि नेपाल में आपदाओं से निपटने के तरीके में व्यापक बदलाव आया है।

 

स्कूली बच्चों से Nvidia तक
देश में तेजी से विस्तार कर रहा डिजिटल भुगतान ढांचा आम नागरिकों, कारोबारियों और विदेशों में रहने वाले दानदाताओं को सीधे सरकारी राहत कोष से जोड़ रहा है। 'पोस्ट' की खबर के अनुसार, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के 11वें दिन तक राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपये (एनपीआर) से अधिक की राशि जमा हो चुकी थी। राहत कोष में योगदान देने वालों में स्कूली बच्चों से लेकर वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी 'एनवीडिया' तक शामिल हैं। नेपाल में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोग सरकार के खाते में डिजिटल माध्यम से सीधे रकम भेज सके हैं। वर्ष 2015 में आए भूकंप के दौरान नेपाल या विदेश में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी राहत कोष में सीधे पैसा भेजने का इस प्रकार का डिजिटल माध्यम उपलब्ध नहीं था। देश के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि डिजिटल भुगतान और प्रौद्योगिकी ने राहत राशि जुटाने की प्रक्रिया काफी आसान बना दी है।

 

सीधे राशि भेजने की व्यवस्था
'पोस्ट' की खबर में वाग्ले के हवाले से कहा गया, ''विदेशों में रहने वाले दानदाताओं के लिए हमने वीजा और मास्टरकार्ड जैसे डॉलर में भुगतान करने वाले कार्ड से सीधे राशि भेजने की व्यवस्था की है। अब उन्हें बैंक जाने या अंतरराष्ट्रीय बैंक हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है।'' वित्त मंत्रालय, डिजिटल भुगतान कंपनी 'फोनपे' और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (एनसीएचएल) के आंकड़े बताते हैं कि आपदा राहत के लिए दान देने में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान एक प्रमुख माध्यम बन गया है। फोनपे नेटवर्क के जरिये हुए 8,89,145 लेनदेन में से 8,15,219 नेपाल के भीतर किए गए क्यूआर भुगतान थे, जिनसे राहत कोष में 2.095 अरब नेपाली रुपये जमा हुए। एनसीएचएल के नेटवर्क के जरिये शनिवार दोपहर तक 2,46,614 लेनदेन दर्ज किए गए थे। इनमें घरेलू क्यूआर भुगतान की संख्या सबसे अधिक रही। ऐसे 1,12,932 लेनदेन से 39.05 करोड़ नेपाली रुपये जुटाए गए।

 

अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़ी  भुगतान प्रणाली
नेपाल की इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियां अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़ी हैं जिससे विदेशों में रहने वाले नेपाली और अंतरराष्ट्रीय दानदाता पारंपरिक तरीके से बैंक हस्तांतरण के बिना भी योगदान दे पा रहे हैं। वीजा और मास्टरकार्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्ड की मदद से 93,850 लेनदेन के जरिए राहत कोष में सीधे 1.4 अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा किए गए हैं। इन भुगतानों को '3डी सिक्योर' प्रणाली (ऑनलाइन कार्ड भुगतान की प्रमाणीकरण व्यवस्था) के जरिये सत्यापित किया गया। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कोइराला ने कहा, ''पहले आपदाओं में लोगों को दान देने के लिए बैंक जाकर कतार में खड़ा होना पड़ता था।

 

बैंकों और वित्तीय संस्थानों में डिजिटल बदलाव के बाद अब कोई भी मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिये आसानी से राहत राशि भेज सकता है।'' भारत के यूपीआई और चीन के 'अलीपे' के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों के जरिये भी राहत राशि भेजी गई है। शनिवार तक यूपीआई के जरिये राहत कोष में 4.854 करोड़ नेपाली रुपये और अलीपे के जरिये 1.797 करोड़ नेपाली रुपये जमा किए गए थे। समाचार पोर्टल 'ईकांतिपुर डॉट कॉम' के अनुसार, नेपाल की सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियां भी बाढ़ से प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए आगे आई हैं।  

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