Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Jan, 2026 03:22 PM

Pongal 2026 Date: हिंदू पंचांग और तमिल परंपरा के अनुसार पोंगल 2026 का पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। पोंगल को तमिलनाडु के नववर्ष का प्रथम दिन माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित है और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इसी...
Pongal 2026 Date: हिंदू पंचांग और तमिल परंपरा के अनुसार पोंगल 2026 का पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। पोंगल को तमिलनाडु के नववर्ष का प्रथम दिन माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित है और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है। इसी समय उत्तर भारत में मकर संक्रांति, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं।

पोंगल क्यों मनाते हैं? (Why is Pongal Celebrated)
पोंगल का मुख्य उद्देश्य नई फसल के आगमन और कटाई के मौसम के समापन का उत्सव मनाना है। यह पर्व किसानों की मेहनत, धरती माता की उर्वरता और सूर्य देव की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। शास्त्रों के अनुसार, इस काल में भगवान छह महीने की योगनिद्रा (दक्षिणायन) के बाद जागते हैं और मानव जाति पर धन, अन्न और समृद्धि की वर्षा करते हैं। सूर्य को संपूर्ण सृष्टि की जीवन शक्ति मानकर उनकी उपासना की जाती है।

पोंगल कैसे मनाया जाता है? (4 Days of Pongal Festival)
भोगी पोंगल
पोंगल का पहला दिन भोगी पोंगल कहलाता है। इस दिन घरों की गहन सफाई की जाती है और पुराने, अनुपयोगी सामान का त्याग किया जाता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ है नकारात्मकता को छोड़कर नए जीवन का स्वागत।
सूर्य पोंगल
दूसरे दिन सूर्य पोंगल मनाया जाता है, जो इस पर्व का मुख्य दिन है। सूर्य देव की पूजा के बाद नई फसल से बनी मीठी खीर या चावल की डिश “पोंगल” बनाई जाती है। उबलते दूध का ऊपर आना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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मट्टू पोंगल
तीसरा दिन मट्टू पोंगल मवेशियों को समर्पित होता है। गाय और बैलों को स्नान कराकर सजाया जाता है, पूजा की जाती है और विशेष भोजन खिलाया जाता है, क्योंकि खेती में इनका विशेष योगदान होता है।
कानूम पोंगल
अंतिम दिन कानूम पोंगल सामाजिक उत्सव का दिन होता है। लोग रिश्तेदारों और मित्रों से मिलते हैं, यात्राएं करते हैं और सामूहिक भोज का आनंद लेते हैं।
पोंगल का आध्यात्मिक संदेश
पोंगल हमें प्रकृति, अन्न और परिश्रम के प्रति सम्मान करना सिखाता है। यह पर्व संतुलित जीवन, कृतज्ञता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
