Edited By Niyati Bhandari,Updated: 24 Feb, 2026 12:34 PM

Pradosh Vrat In March 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जीवन के...
Pradosh Vrat In March 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में दो प्रदोष व्रत होते हैं। एक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। जिस वार को यह व्रत पड़ता है, उसी के अनुसार इसका नाम रखा जाता है, जैसे सोम प्रदोष, भौम प्रदोष, रवि प्रदोष आदि।
आइए जानते हैं मार्च 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
मार्च 2026 का पहला प्रदोष व्रत: 01 मार्च (रवि प्रदोष व्रत)
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी 2026 को रात 08 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी और 01 मार्च 2026 को शाम 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी।
चूंकि प्रदोष व्रत प्रदोष काल में मान्य होता है और त्रयोदशी तिथि 01 मार्च को प्रदोष काल में विद्यमान रहेगी, इसलिए पहला प्रदोष व्रत 01 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त (01 मार्च 2026)
प्रदोष काल प्रारंभ: शाम 06 बजकर 21 मिनट
प्रदोष काल समाप्त: शाम 07 बजकर 09 मिनट
इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, अभिषेक और आरती करना शुभ माना गया है।

मार्च 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत: 16 मार्च
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 मार्च 2026 को सुबह 09 बजकर 40 मिनट पर शुरू होगी और 17 मार्च 2026 को सुबह 09 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी।
प्रदोष काल 16 मार्च की संध्या को पड़ने के कारण दूसरा प्रदोष व्रत 16 मार्च 2026 को रखा जाएगा।
(वार के अनुसार इसका नाम निर्धारित होगा।)
पूजा का शुभ मुहूर्त (16 मार्च 2026)
पूजा प्रारंभ: शाम 06 बजकर 30 मिनट
पूजा समापन: रात 08 बजकर 54 मिनट तक
इस समय भगवान शिव का रुद्राभिषेक, शिव चालीसा पाठ, महामृत्युंजय मंत्र जप और दीपदान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
जीवन के संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
आर्थिक और पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है।
संतान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
मृत्यु के बाद शिव धाम में स्थान और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का लगभग 2 घंटे 24 मिनट का समय) शिव पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
March Pradosh Vrat 2026 के अनुसार मार्च महीने में कुल दो प्रदोष व्रत रखे जाएंगे। पहला 01 मार्च (रवि प्रदोष) और दूसरा 16 मार्च 2026 को।
यदि आप भगवान शिव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो प्रदोष काल में विधिपूर्वक व्रत और पूजा अवश्य करें। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया प्रदोष व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
