Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Jan, 2026 10:41 AM

नया साल 2026 शुरू होते ही पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन को एक बड़ी लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
Puri Jagannath Temple Calendar 2026 : नया साल 2026 शुरू होते ही पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन को एक बड़ी लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। मंदिर प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक वार्षिक कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन की स्थिति को पारंपरिक मान्यताओं के विपरीत दिखाने पर विवाद खड़ा हो गया है। बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कैलेंडर की बिक्री रोक दी है और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
क्या थी कैलेंडर में बड़ी चूक?
विवाद का मुख्य कारण कैलेंडर में छपी एक तस्वीर है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रत्न सिंहासन पर बैठने की स्थिति को गलत दिखाया गया है। परंपरा के अनुसार, सिंहासन पर बाएं से दाएं भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं। लेकिन कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के स्थान आपस में बदल दिए गए।
भक्तों ने यह भी पाया कि कैलेंडर में छपी रथ यात्रा की एक तस्वीर में रथों के खींचने का क्रम भी गलत था, जो सदियों पुरानी रीतियों के विरुद्ध है। कुछ प्रतियों में भगवान सुदर्शन की उपस्थिति को भी अनदेखा करने की बात सामने आई है।
प्रशासन की सफाई: पुरानी कलाकृति बनी विवाद की वजह
विवाद गहराने पर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाधी ने स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने बताया कि कैलेंडर में इस्तेमाल की गई तस्वीर ओडिशा राज्य संग्रहालय में संरक्षित एक सदी पुरानी ताड़पत्र पांडुलिपि से ली गई थी।
प्रशासन के अनुसार, यह उस काल के किसी कलाकार की अपनी कल्पना और शैली थी, जिसे ऐतिहासिक धरोहर समझकर कैलेंडर में शामिल किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि यह एक अनजानी मानवीय भूल थी।
सोशल मीडिया पर ओड़िया अस्मिता की गूंज
जैसे ही कैलेंडर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जगन्नाथ भक्तों और सेवायतों ने इसे ओड़िया संस्कृति और परंपरा का अपमान बताया। राजनीतिक गलियारों में भी इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई, जहां विपक्षी दलों ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने और विशेषज्ञों से सलाह न लेने के आरोप लगाए।
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