Edited By Prachi Sharma,Updated: 27 Mar, 2026 09:48 AM

Ram Mandir Surya Tilak : अयोध्या में राम नवमी 2026 का उत्सव केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और आध्यात्मिकता के अनूठे मिलन का गवाह बनने जा रहा है। 27 मार्च को दोपहर 12 बजे, जब पूरा देश राम जन्मोत्सव मना रहा होगा, तब 'सूर्य तिलक' की घटना भगवान राम...
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Ram Mandir Surya Tilak : अयोध्या में राम नवमी 2026 का उत्सव केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और आध्यात्मिकता के अनूठे मिलन का गवाह बनने जा रहा है। 27 मार्च को दोपहर 12 बजे, जब पूरा देश राम जन्मोत्सव मना रहा होगा, तब 'सूर्य तिलक' की घटना भगवान राम के मस्तक को दैवीय आभा से सुशोभित करेगी।
आस्था और तकनीक का संगम
वमी के पावन अवसर पर अयोध्या का भव्य मंदिर एक ऐसी इंजीनियरिंग का प्रदर्शन करेगा, जो प्राचीन श्रद्धा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ती है। यह आयोजन भगवान राम के सूर्यवंशी होने के गौरव को फिर से जीवंत कर देता है।
कैसे काम करेगा यह ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम ?
यह कोई संयोग नहीं, बल्कि विशेषज्ञों की महीनों की मेहनत का परिणाम है। इस प्रणाली को CBRI और बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है मंदिर के शिखर के पास उच्च क्षमता वाले दर्पण और लेंस लगाए गए हैं। सूर्य की किरणें तीसरी मंजिल से परावर्तित होकर पाइपों के जरिए गर्भगृह तक पहुंचती हैं। दोपहर ठीक 12 बजे, जब सूर्य अपनी विशेष स्थिति में होगा, किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर एक चमकते हुए तिलक के रूप में विराजेंगी। यह दृश्य लगभग 4 मिनट तक बना रहेगा।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम का जन्म सूर्यवंश में हुआ था। सूर्य को उनका कुलदेवता माना जाता है। ऐसे में 'सूर्य तिलक' को साक्षात सूर्य देव द्वारा अपने वंशज को दिया गया आशीर्वाद माना जाता है। यह पल भक्तों के लिए केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव है।
श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं
अयोध्या में उमड़ने वाले लाखों भक्तों के लिए प्रशासन और ट्रस्ट ने व्यापक इंतजाम किए हैं:
लाइव स्ट्रीमिंग: दूरदर्शन और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर के श्रद्धालु इस दृश्य को घर बैठे देख सकेंगे।
LED स्क्रीन: मंदिर परिसर और अयोध्या के प्रमुख चौराहों पर बड़ी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि भीड़ में भी हर व्यक्ति सूर्य तिलक के दर्शन कर सके।