Ramayan Katha : हार मानने से पहले जरूर पढ़ें ये कहानी , कैसे एक पक्षी बना विजय की प्रेरणा

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 02:15 PM

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Ramayan Katha : लंका विजय की कामना से वानर सेना समुद्र तट पर पहुंच गई थी परन्तु बीच रास्ते में विशाल समुद्र को देखकर वह घबरा गई। लंका पर आक्रमण करने का स्वप्न टूटता देख, उसमें निराशा पनपने लगी। सेना नायक निराशा के कारण प्रश्नवाचक दृष्टि से भगवान राम...

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Ramayan Katha : लंका विजय की कामना से वानर सेना समुद्र तट पर पहुंच गई थी परन्तु बीच रास्ते में विशाल समुद्र को देखकर वह घबरा गई। लंका पर आक्रमण करने का स्वप्न टूटता देख, उसमें निराशा पनपने लगी। सेना नायक निराशा के कारण प्रश्नवाचक दृष्टि से भगवान राम की ओर देखने लगे। 

भगवान राम को एक पक्षी दिखाई दिया, जो बार-बार अपनी चोंच में पानी भरकर लाता और उसे रेत में डाल देता। उसी प्रकार बार-बार चोंच में वह रेत भरकर ले जाता और उसे समुद्र के पानी में डाल देता। भगवान राम नेे उस पक्षी के साहस और लग्न को देखकर अपने सैनिकों से कहा कि- “हे वानर वीरो ! इस पक्षी को देखो जो बार-बार अपनी चोंच से पानी ले जाकर रेत में डाल रहा है और उसी प्रकार बार-बार अपनी चोंच से रेत ले जाकर पानी में डाल रहा है।

 वह शायद किसी बात पर समुद्र से रुष्ट है। इसलिए बार-बार पानी को रेत में और रेत को पानी में डालकर समुद्र को सुखाने का प्रयत्न कर रहा है। जब एक छोटा-सा पक्षी समुद्र पर विजय पाने का साहस रखता है, तो तुम क्यों इसे देखकर अपना साहस खोते हो ? तुम तो वीर हो और तुम्हारे सामने इस पक्षी की शक्ति कुछ भी नहीं है।” 

वानर सैनिकों ने राम की बात मानकर पक्षी से प्रेरणा ली व नल और नील की सहायता से दूर-दूर से एक-एक पत्थर लेकर समुद्र के तल में डालना शुरू किया। जिससे पुल का निर्माण हुआ और लंका पर आक्रमण करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। प्रेरणा से बड़े-बड़े कार्य भी सरल हो जाते हैं और कई बार प्रेरणा के बिना शक्ति रहते हुए भी मनुष्य हार जाता है।


 

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