Edited By Prachi Sharma,Updated: 26 Mar, 2026 08:21 AM

ऋषिकेश (इंट): उत्तराखंड का ऋषिकेश अब तेजी से योग की अंतर्राष्ट्रीय राजधानी के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। हाल ही में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में देश-विदेश से हजारों योग साधकों ने भाग लेकर इस नगरी को वैश्विक मंच पर और अधिक स्थापित...
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ऋषिकेश (इंट): उत्तराखंड का ऋषिकेश अब तेजी से योग की अंतर्राष्ट्रीय राजधानी के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। हाल ही में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में देश-विदेश से हजारों योग साधकों ने भाग लेकर इस नगरी को वैश्विक मंच पर और अधिक स्थापित किया है। गंगा तट पर आयोजित इस महोत्सव ने योग, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
80 देशों से पहुंचे साधक
एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष आयोजित महोत्सव में करीब 80 देशों से 1,800 से अधिक योग जिज्ञासुओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न योग सत्रों, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर भारतीय परंपरा का अनुभव किया। यह आयोजन न केवल योग सीखने का माध्यम बना, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक छवि को भी मजबूत करने में सफल रहा।
गंगा तट बना आकर्षण का केंद्र
गंगा के पावन किनारे आयोजित योग सत्रों ने प्रतिभागियों को खास अनुभव दिया। सुबह-शाम होने वाले योग, ध्यान और संगीत कार्यक्रमों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। विदेशी मेहमानों के लिए यह अनुभव खास तौर पर आकर्षण का केंद्र रहा। महोत्सव में योग के साथ-साथ भजन, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। प्रसिद्ध कलाकारों और संतों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को भक्ति और शांति से भर दिया जिससे प्रतिभागियों को समग्र आध्यात्मिक अनुभव मिला।
सरकार और संस्थाओं की भूमिका
राज्य सरकार और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से इस महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। गढ़वाल मंडल विकास निगम और अन्य संगठनों ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में अहम भूमिका निभाई। आयोजकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस महोत्सव को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से ऋषिकेश की पहचान योग और वैलनैस टूरिज्म के केंद्र के रूप में और मजबूत होगी। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।