Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Jan, 2026 02:54 PM

हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत पावन माना गया है।
Satyanarayan Ashtakam Stotra : हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत पावन माना गया है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में विराजमान होता है और धरती पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है। यदि आप भी अपने जीवन में लंबे समय से मानसिक अशांति, पारिवारिक कलह या आर्थिक बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो शास्त्रों में इसका एक अचूक समाधान बताया गया है- श्री सत्यनारायणाष्टकम् स्तोत्र का पाठ। यह दिव्य स्तोत्र न केवल भगवान सत्यनारायण की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि इसके छंदों में वह शक्ति है जो घर के वातावरण से नकारात्मकता को जड़ से मिटा सकती है। पौष पूर्णिमा की शांत रात्रि में जब पूरा संसार निद्रा में होता है, तब पूरी श्रद्धा के साथ किया गया यह पाठ एक चमत्कार की तरह काम करता है। यह आपके भीतर के विश्वास को जगाता है और घर में सुख-शांति के नए मार्ग खोलता है। तो आइए जानते हैं, इस पूर्णिमा की रात श्री सत्यनारायणाष्टकम् का पाठ कैसे आपके जीवन में खुशियों का संचार कर सकता है।
श्रीसत्यनारायणाष्टकम् स्तोत्र
आदिदेवं जगत्कारणं श्रीधरं लोकनाथं विभुं व्यापकं शंकरम्।
सर्वभक्तेष्टदं मुक्तिदं माधवं सत्यनारायणं विष्णुमीशम्भजे॥
सर्वदा लोककल्याणपारायणं देवगोविप्ररक्षार्थसद्विग्रहम्।
दीनहीनात्मभक्ताश्रयं सुन्दरम् श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
दक्षिणे यस्य गंगा शुभा शोभते राजते सा रमा यस्य वामे सदा।
यः प्रसन्नाननो भाति भव्यश्च तं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
संकटे संगरे यं जनः सर्वदा स्वात्मभीनाशनाय स्मरेत् पीडितः।
पूर्णकृत्यो भवेद् यत्प्रसादाच्च तं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥

वाञ्छितं दुर्लभं यो ददाति प्रभुः साधवे स्वात्मभक्ताय भक्तिप्रियः।
सर्वभूताश्रयं तं हि विश्वम्भरं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
ब्राह्मणः साधुवैश्यश्च तुंगध्वजो येऽभवन् विश्रुता यस्य भक्त्यामराः।
लीलया यस्य विश्वं ततं तं विभुं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
येन चाब्रम्हाबालतृणं धार्यते सृज्यते पाल्यते सर्वमेतज्जगत्।
भक्तभावप्रियं श्रीदयासागरं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
सर्वकामप्रदं सर्वदा सत्प्रियं वन्दितं देववृन्दैर्मुनीन्द्रार्चितम्।
पुत्रपौत्रादिसर्वेष्टदं शाश्वतं श्रीसत्यनारायणाष्टकम्॥
अष्टकं सत्यदेवस्य भक्त्या नरः भावयुक्तो मुदा यस्त्रिसन्ध्यं पठेत्।
तस्य नश्यन्ति पापानि तेनाग्निना इन्धनानीव शुष्काणि सर्वाणि वै॥

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