Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Mar, 2026 02:36 PM

Sheetala Ashtami 2026 : हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी, जिसे उत्तर भारत में 'बसौड़ा' के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का यह पावन पर्व...
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Sheetala Ashtami 2026 : हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी, जिसे उत्तर भारत में 'बसौड़ा' के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का यह पावन पर्व 11 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से शीतला माता को समर्पित है, जिन्हें स्वच्छता, शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और उनकी आरती करने से चेचक, खसरा और आंखों की बीमारियों जैसे संक्रामक रोगों से मुक्ति मिलती है।
॥ श्री शीतला माता की आरती ॥
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानीसब फल की दाता॥
ॐ जय शीतला माता।
रतन सिंहासन शोभित,श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें,जगमग छवि छाता॥
ॐ जय शीतला माता।
विष्णु सेवत ठाढ़े,सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणतपार नहीं पाता॥
ॐ जय शीतला माता।
इन्द्र मृदङ्ग बजावतचन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावैनारद मुनि गाता॥
ॐ जय शीतला माता।
घण्टा शङ्ख शहनाईबाजै मन भाता।
करै भक्त जन आरतीलखि लखि हर्षाता॥
ॐ जय शीतला माता।
ब्रह्म रूप वरदानीतुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देतीमातु पिता भ्राता॥
ॐ जय शीतला माता।
जो जन ध्यान लगावेप्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावेभवनिधि तर जाता॥
ॐ जय शीतला माता।
रोगों से जो पीड़ित कोईशरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल कायाअन्ध नेत्र पाता॥

ॐ जय शीतला माता।
बांझ पुत्र को पावेदारिद्र कट जाता।
ताको भजै जो नाहींसिर धुनि पछताता॥
ॐ जय शीतला माता।
शीतल करती जन कीतू ही है जग त्राता।
उत्पत्ति बाला बिनाशनतू सब की माता॥
ॐ जय शीतला माता।
दास नारायणकर जोरी माता।
भक्ति आपनी दीजैऔर न कुछ माता॥
ॐ जय शीतला माता।

पूजा विधि
अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें।
माता के सामने व्रत और परिवार के स्वास्थ्य का संकल्प लें।
माता को सप्तमी को बने हुए ठंडे पकवानों (दही, राबड़ी, मीठे चावल) का भोग लगाएं।
माता शीतला को नीम की टहनी और पत्तियां अर्पित करें।
यदि संभव हो तो भगवान शिव द्वारा रचित शीतलाष्टक का पाठ करें।