Bhalchandra Chaturthi 2026 : हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है, और चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी होने वाली है क्योंकि इस...
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Bhalchandra Chaturthi 2026 : हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है, और चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी होने वाली है क्योंकि इस दिन तीन दुर्लभ शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भालचंद्र चतुर्थी का व्रत करने से विघ्नहर्ता गणेश भक्तों के सभी संकटों को हर लेते हैं। इस आर्टिकल में जानेंगे भालचंद्र चतुर्थी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, बनने वाले विशेष योग और गणेश अथर्वशीर्ष के पाठ से मिलने वाले चमत्कारी लाभों के बारे में।
भालचंद्र चतुर्थी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तारीख: 7 मार्च 2026, शनिवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 मार्च 2026 को शाम 06:15 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 मार्च 2026 को रात 08:30 बजे तक
भालचंद्र चतुर्थी पर बनने वाले 3 शुभ योग
वर्ष 2026 की भालचंद्र चतुर्थी इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन ग्रहों की स्थिति त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का मेल बना रही है।
सर्वार्थ सिद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किया गया कोई भी कार्य सिद्ध होता है। यदि आप नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या कोई शुभ निवेश करना चाहते हैं, तो यह समय उत्तम है।
हर्षण योग: यह योग प्रसन्नता और भाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा-पाठ से मानसिक शांति और परिवार में सौहार्द बढ़ता है।
त्रिपुष्कर योग: इस योग की विशेषता यह है कि इसमें किए गए शुभ कार्य का फल तीन गुना प्राप्त होता है।

।। अथ श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तुति ।।
ॐ नमस्ते गणपतये।
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।
त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।
त्वमेव केवलं धर्तासि।।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।
त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।
ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।
अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।
अव श्रोतारं। अवदातारं।।
अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।
अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।
अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।
अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।
सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।
त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।
सर्व जगदिदं त्वत्तो जायते।
सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।
सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।
सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।
त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।
त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।
त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।
त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।
त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।
त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।
त्वं शक्तित्रयात्मक:।।
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।
वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।
गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।
अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।
तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।
गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।
अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।
नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।
गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। गणपति देवता।।
ॐ गं गणपतये नम:।।

अथर्वशीर्ष पाठ से होने वाले लाभ
यदि आपके कार्यों में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो इस दिन 21 बार अथर्वशीर्ष का पाठ करने से रास्ते खुल जाते हैं।
विद्यार्थियों के लिए इसका पाठ एकाग्रता बढ़ाने वाला और ज्ञानवर्धक होता है।
2026 में त्रिपुष्कर योग होने के कारण, इस वर्ष अथर्वशीर्ष का पाठ करने से अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होगा।