Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Jul, 2026 01:02 PM

हिंदू पंचांग के अनुसार, 30 अगस्त से देवों के देव का प्रिय माह सावन की शुरुआत होने वाली है। सावन का महीना शिव जी की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत खास और शुभ माना जाता है।
Sawan Shivling Jal Abhishekam Mystery : हिंदू पंचांग के अनुसार, 30 अगस्त से देवों के देव का प्रिय माह सावन की शुरुआत होने वाली है। सावन का महीना शिव जी की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत खास और शुभ माना जाता है। हर कोई अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, शहद और धतूरा अर्पित करते हैं। लेकिन अक्सर अपने बड़े-बजुर्गों को कहते हुए सुना होगा कि शिवलिंग पर हमेशा तांबे के लोटे में जल चढ़ाना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे का लोटा ही सबसे शुभ और उत्तम क्यों माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे के रहस्य के बारे में-
तांबे का लोटा ही क्यों माना जाता है शुभ?
मान्यताओं के अनुसार, तांबे को एक बेहद पवित्र और शुद्ध धातु माना गया है। तांबे के पात्र से जल चढ़ाने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। शिव पुराण के अनुसार, तांबे के लोटे से जल अर्पित करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
वैज्ञानिक रहस्य
विज्ञान के अनुसार, तांबा बिजली और ऊर्जा का सबसे बेहतरीन सुचालक है। शिवलिंग से लगातार अदृश्य ऊर्जा तरंगें निकलती रहती हैं। जब तांबे के पात्र से जल शिवलिंग पर गिरता है, तो तांबा और जल मिलकर उस तीव्र ऊर्जा को संतुलित करते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शांत और सकारात्मक हो जाता है। तांबे में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। तांबे के बर्तन में रखा पानी पूरी तरह शुद्ध और चार्ज हो जाता है। ऐसे शुद्ध जल से महादेव का अभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है।