माथे पर तिलक लगाना, नमस्कार करना व चरण स्पर्श करने का क्या है वैज्ञानिक कारण?

Edited By Updated: 27 Aug, 2020 03:05 PM

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हिंदू धर्म से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं है। इन्हीं में से 3 ऐसी मान्यताएं हैं जो लगभग हर कोई मानता व अपनाता है। बता दें हम बात कर रहे हैं माथे पर तिलक लगाना

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हिंदू धर्म से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं है। इन्हीं में से 3 ऐसी मान्यताएं हैं जो लगभग हर कोई मानता व अपनाता है। बता दें हम बात कर रहे हैं माथे पर तिलक लगाना, हाथ जोड़कर प्रणाम करना तथा चरण स्पर्श करना। ये ऐसी मान्यताएं हैं जो न केवल हमारे देश में बल्कि दुनिया भर के कई हिस्सों प्रचलित है। अगर मौज़ूदा समय की बात करें तो कोरोना के चलते विदेशों में भी हाथ जोड़कर एक दूसरे को अभिवादन करने लगे। हालांकि इसके पीछे कारण कोरोना के बचाव है। अगर सनातन धर्म के हिसाब से देखें को इसका धार्मिक महत्व बताया गया। मगर इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है? क्या आप ने कभी इसके बारे में सोचा है? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इन तमाम समस्याओं के पीछे का वैज्ञानिक कारण- 
 

माथे पर तिलक लगाना- 
हिंदू धर्म का कोई आयोजन हो या फिर सुबह पूजा पाठ, दोनों में ही भगवान को तिलक लगाने के बाद स्वयं तिलक लगाया जाता है। इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को बहुत हैं, जैसे कि इसे लगाने से भाग्य चमकता है, शुभ प्रभाव देखने को मिलते हैं। तो वहीं सुहागन महिलाओं के लिए तो कुमकुम सुहाग और सौंदर्य के प्रतीक के रूप में जीवन का अभि‍न्न अंग होता है। 
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मगर बात अगर इसके वैज्ञानिक महत्व की हो तो तर्क ये है मानव शरीर में आंखों के मध्य से लेकर माथे तक एक नस होती है। जब भी माथे पर तिलक या कुमकुम लगाया जाता है, तो उस नस पर दबाव पड़ता है जिससे वह अधि‍क साक्रिय हो जाती है। साथ ही पूरे चेहरे की मांसपेशि‍यों तक रक्तसंचार बेहतर तरीके से होता है। तो वहीं इससे उर्जा का संचार भी अधिक होता है और सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

हाथ जोड़ना या नमस्ते करना- 
भारत में लगभग लोग जब किसी से मिलते है तो अभि‍वादन के तौर पर हाथ जोड़कर एक-दूसरे को प्रणाम करते हैं। जिसे नमस्कार व नमस्ते कहा जाता है, कहा जाता है ये एक दूसरे के प्रति सम्मान का प्रतीक होता है। किंतु अभि‍वादन के इस तरीके पर वैज्ञानिक तर्क ये है कि जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो उन पर दबाव पड़ता है। यह दबाव एक तरह से एक्यूप्रेशर का काम करता है। एक्यूप्रेशर पद्धति की मानें तो यह दबाव आंखों, कानों और दिमाग के लिए बहुत ही प्रभावकारी माना जाता है। 
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चरण स्पर्श- 
ईश्वर से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा है, जिसे चरण स्पर्श करना कहते हैं। कहा जाता है पैर छूने से केवल झुककर अपनी कमर दुखाना नहीं है, बल्कि इसका संबंध ऊर्जा से है। जी हां, वैज्ञानिक कहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य के शरीर में मस्तिष्क से लेकर पैरों तक लगातार उर्जा का संचार होता है। जिसे कॉस्मिक ऊर्जा कहते हैं। जब इंसान किसी के पैर छूने के लिए झुकता है तो असल में वो व्यक्ति ऊर्जा ले रहा होता है। ऐसा करने से पैरों से ऊर्जा का प्रवाह हाथों के जरिए हमारे शरीर में होता है।
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