Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Apr, 2026 10:15 AM

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों संबंधी सरकार द्वारा कानून बनाने को लेकर बुलाई गई पंथक बैठक में समूह सिख जत्थेबंदियों ने एकसुर होकर पंथक भावनाओं की तर्जमानी को यकीनी बनाने की मांग की है।
अमृतसर (सर्बजीत): शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों संबंधी सरकार द्वारा कानून बनाने को लेकर बुलाई गई पंथक बैठक में समूह सिख जत्थेबंदियों ने एकसुर होकर पंथक भावनाओं की तर्जमानी को यकीनी बनाने की मांग की है।
शिरोमणि कमेटी के मुख्य कार्यालय तेजा सिंह समुंदरी हॉल में हुई इस बैठक में कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी, श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह व दमदमी टकसाल के प्रमुख बाबा हरनाम सिंह खालसा सहित विभिन्न निहंग सिंह दलों, कार सेवा वाले महापुरुषों व सिख मिशनरी संस्थाओं के प्रमुख शामिल हुए।
विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि सिख मामलों संबंधी कोई भी कानून बनाने समय सरकार पंथक जत्थेबंदियों की राय अवश्य लें। यदि सरकार अपनी मर्जी से कानून बनाएगी तो वह अधूरा रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले कौम के लिए अत्यंत गंभीर हैं, जिनके लिए सख्त सजाओं का प्रबंध सिख विचारधारा के अनुसार होना चाहिए।
अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने एक विशेष प्रस्ताव पेश किया जिसे जयकारों की गूंज में प्रवानगी दी गई। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि सिखों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी ‘जागत जोति’ और साक्षात गुरु हैं। पंजाब सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया बेशक अच्छी है लेकिन इसमें पंथक सुझावों की कमी है। शिरोमणि कमेटी सिखों की प्रतिनिधिता संस्था होने के लिए कौम की भावनाओं की तर्जमानी करने के लिए जिम्मेदार है।