Edited By Rohini Oberoi,Updated: 07 Apr, 2026 10:02 AM

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री रास्तों में बाधाओं के बावजूद भारत सरकार ने देश के प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को एक अहम आदेश...
Free Trade LPG Cylinder Supply Doubled : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री रास्तों में बाधाओं के बावजूद भारत सरकार ने देश के प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए राज्यों को दी जाने वाली 5 किलोग्राम के 'फ्री ट्रेड एलपीजी' (FTL) सिलेंडरों की दैनिक आपूर्ति को दोगुना कर दिया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रवासी मजदूरों तक आसानी से खाना पकाने का ईंधन पहुंचाना है। इस फैसले से 5 किलो वाले सिलेंडरों की दैनिक बिक्री 1 लाख यूनिट से ऊपर पहुंचने की उम्मीद है। ये सिलेंडर राज्य सरकारों और उनके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के पास उपलब्ध होंगे जो तेल कंपनियों (OMCs) की मदद से सीधे मजदूरों तक पहुंचाए जाएंगे।
सप्लाई के आंकड़े: तेजी से बढ़ रही मांग
पिछले कुछ दिनों में छोटे गैस सिलेंडरों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है:
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बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि: 25 मार्च को जहां 37,000 सिलेंडरों की बिक्री हुई थी वहीं 4 अप्रैल तक यह आंकड़ा 90,000 के पार पहुंच गया।
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कुल वितरण: 23 मार्च से अब तक विभिन्न राज्यों में लगभग 6.6 लाख 5 किलो वाले FTL सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
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जागरूकता अभियान: तेल कंपनियों ने अब तक 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 550 से अधिक जागरूकता कैंप लगाए हैं ताकि मजदूरों को इस सुविधा की जानकारी मिल सके।
चुनौतियां और भारत की तैयारी
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव (विशेषकर पश्चिम एशिया में) के कारण एलपीजी की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण रास्तों के बंद होने से चिंता बढ़ी है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात करता है। भारत ने अपना घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर 46,000-47,000 टन प्रतिदिन कर दिया है। सरकार ने अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 8 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि घरों, अस्पतालों और मजदूरों को गैस की कमी न हो।