हर धार्मिक संस्था के लिए नियम जरूरी, अराजकता मंजूर नहीं : सुप्रीम कोर्ट

Edited By Updated: 29 Apr, 2026 10:50 AM

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नई दिल्ली (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि किसी धार्मिक संस्था के प्रबंधन के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि उसके संचालन के लिए कोई ढांचा न हो और

नई दिल्ली (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि किसी धार्मिक संस्था के प्रबंधन के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि उसके संचालन के लिए कोई ढांचा न हो और प्रबंधन को लेकर अराजकता की स्थिति नहीं हो सकती। न्यायालय ने कहा कि ऐसी संस्थाओं के कामकाज के लिए एक व्यवस्था एवं नियम होने चाहिएं। 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह टिप्पणी केरल के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

न्यायमूर्ति अमानुल्ला ने कहा कि प्रबंधन के अधिकार का मतलब ढांचे का अभाव नहीं हो सकता और हर चीज के लिए एक व्यवस्था होनी चाहिए।  न्यायमूर्ति अमानुल्ला ने कहा, ‘अराजकता नहीं हो सकती। चाहे दरगाह हो या मंदिर, संस्था से जुड़े तत्व होंगे, धार्मिक क्रियाओं का एक तरीका होगा और कार्यों के संपादन का क्रम होगा। किसी न किसी को इसे विनियमित करना होगा।’

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