Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Jun, 2026 03:10 PM

एक बार स्वामी विवेकानंद के आश्रम में एक व्यक्ति आया, उसने स्वामी जी से कहा मैं बहुत दुखी हूं, मैं मेहनत करता हूं लेकिन सफलता नहीं मिलती। उसने स्वामी जी से कहा कि मैं पढ़ा-लिखा हूं और मेहनती हूं, फिर भी कामयाब नहीं हो पा रहा हूं।
Swami Vivekananda Story : एक बार स्वामी विवेकानंद के आश्रम में एक व्यक्ति आया, उसने स्वामी जी से कहा मैं बहुत दुखी हूं, मैं मेहनत करता हूं लेकिन सफलता नहीं मिलती। उसने स्वामी जी से कहा कि मैं पढ़ा-लिखा हूं और मेहनती हूं, फिर भी कामयाब नहीं हो पा रहा हूं। कृपया कोई रास्ता अथवा मूल मंत्र बताएं, जिससे मैं भी सफल हो सकूं। इस पर स्वामी जी ने उससे उनके कुत्ते को सैर करा लाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि तुम कुछ दूर तक मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ।
इसके बाद मैं तुम्हें तुम्हारे दुखों को दूर करने का उपाय बताता हूं। इससे वह व्यक्ति हैरान हो गया, लेकिन स्वामी जी की बात मानकर कुत्ते को सैर कराने लेकर चला गया। वह व्यक्ति लौटा तो कुत्ता थका हुआ था, लेकिन वह व्यक्ति थका नहीं था। इस पर स्वामी जी ने पूछा कि ये कुत्ता इतना ज्यादा कैसे थक गया, जबकि तुम तो थके नहीं दिख रहे हो।

इस पर उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि मैं अपने रास्ते पर सीधे चल रहा था, लेकिन कुत्ता गली के कुत्तों के पीछे भाग रहा था और लड़कर फिर लौट आता था। इस कुत्ते ने मुझसे ज्यादा दौड़ भाग की है, इससे यह थक गया है। इस पर स्वामी विवेकानंद ने कहा कि इसी में तुम्हारे दुख दूर करने का भी जवाब है। तुम्हारा लक्ष्य तुम्हारे सामने है लेकिन तुम लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही दूसरों से होड़ में जुट जाते हो और दूसरे रास्ते पर चलकर अपनी मंजिल से दूर होते जाते हो। यह सुनकर वह व्यक्ति संतुष्ट हो गया।

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