Vastu Myths & Logic: वास्तु का सबसे बड़ा भ्रम, नींव की खुदाई में मिली हड्डियां और कोयला क्या लाते हैं बर्बादी? जानिए श्मशान के पास घर बनाने का असली सच!

Edited By Updated: 11 Jun, 2026 10:31 AM

vastu myths and logic

Vastu Myths & Logic: क्या प्लॉट की खुदाई में हड्डियां निकलना अशुभ है? वास्तु के इस पुराने अंधविश्वास को वैज्ञानिक तर्क और हिरोशिमा-धनबाद जैसे उदाहरणों से समझें। जानिए श्मशान के पास घर बनाने का वास्तु प्रभाव।

Vastu Myths & Logic: वास्तुशास्त्र की पुस्तकों में इस बात का जिक्र किया जाता है कि यदि किसी भूखण्ड की नींव में खुदाई के दौरान मिट्टी में हड्डियां व कोयला मिले तो वह भूखण्ड बहुत अशुभ होता है। ऐसे प्लाॅट पर भवन का निर्माण करने से अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह केवल अंधविश्वास है। पृथ्वी का अस्तित्व करोड़ों वर्षों से है, जिसमें कई बार भूकंप के कारण बहुत सारे उलट-फेर होते रहते हैं। जहां आज हिमालय पर्वत है, वहां कभी सागर हुआ करता था। कई कब्रिस्तान भी इस उलट-फेर के शिकार हुए हैं। सृष्टि के आरम्भ से ही प्राणियों के जन्म-मृत्यु का सिलसिला जारी है। आपसी लड़ाइयों में भी लोग मारे जाते रहे हैं। शायद ही पृथ्वी पर कोई ऐसी जगह होगी, जहां मार-काट नहीं हुई हो, युद्ध न हुए हो। इसी प्रकार पशु-पक्षी भी मरते रहते हैं। समय-समय पर मानव व पशु-पक्षियों पर प्राकृतिक आपदाएं भी आती रही हैं। इसका मतलब तो यह हुआ कि, पृथ्वी पर कोई भी ऐसी जगह न होगी जहां गहराई में हड्डियां, कोयला इत्यादि मौजूद न हो।

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द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नागासाकी और हिरोशिमा पर एटम बम गिराए गए। जहां लाखों लोग मारे गए, हर चीज राख के ढेर में बदल गई। यदि आज वहां खोदा जाए तो काफी गहराई तक हड्डियां व कोयला मिलेगा, पर जापान के बर्बाद हुए वही शहर आज जन्नत में बदल गए हैं। वहां बाग-बगीचे व भव्य गगनचुम्बी इमारतें हैं जहां सभी लोग पुनः खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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भारत व विश्व की कई कोयला खदानों के ऊपर कई शहर बसे हुए हैं जैसे धनबाद, छिंदवाड़ा, परासिया, सिंगरेनी इत्यादि। इन कोयला खदानों के ऊपर रहने वाले लोग भी अन्य शहरों में रहने वाले लोगों जैसा ही जीवन-बसर कर रहे हैं। बढ़ती हुई आबादी के कारण विश्व के कई बड़े शहरों में श्मशान घाट या कब्रिस्तान छोटे हो गए हैं, जैसे मुम्बई का सांताक्रुज श्मशान घाट। आज वहां सुंदर भवन बन गए हैं, जहां लोग सुखद जिंदगी जी रहे हैं।

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मैंने ऐसे कई सफल व्यावसायिक संस्थान देखे हैं, जहां संस्थान के अंदर ही कब्र बनी हुई है, जिसकी आदर भाव से धूपबत्ती की जाती है और वह संस्थान दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। अरब देशों में कई कबीले अपने घर के पीछे ही अपने प्रियजनों को दफन कर देते हैं। हमारे देश में भी कई लोग अपने पालतू जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली को अपने परिसर में ही दफन कर देते हैं। वह लोग भी उन घरों में सुखद जीवन बिताते हैं।

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भारतीय धर्मग्रन्थों के अनुसार, हर जीव में आत्मा होती है और मृत्यु के बाद हर जीव अपना चोला बदलकर दूसरी योनि में जन्म लेता है। ऐसी स्थिति में आप सोचिए जब हम अपने घरों में पेस्ट कन्ट्रोल कराते हैं, चूहे मारने की दवाईयां रखते हैं तो क्या उस वक्त हर घर एक श्मशान नहीं बन जाता? कई परिवारों में नानवेज खाया जाता है, कई घरों में तो जानवरों को घर में ही काटा जाता हैं इनमें से भी तो हड्डियां निकलती हैं। सुखद जीवन के लिए बस एक अच्छे वास्तु अनुरूप भूखण्ड का चुनाव करना चाहिए।

अतः श्मशान या कब्रिस्तान के पास घर बनाये जा सकते हैं। इससे कोई वास्तुदोष नहीं आता लेकिन वहां से होने वाली गतिविधियों से मन में वेदना जरूर आ सकती है। इसलिए श्मशान की दिशा में घर की बाउंड्री वॉल थोड़ी ऊंची बना लें तो ज्यादा व्यावहारिक होता है।

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वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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