Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Feb, 2026 01:26 PM
हर साल 2 फरवरी को पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस (वर्ल्ड वैटलैंट्स डे) मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पानी से भरी जमीनें, जिन्हें हम आर्द्रभूमि यानी वैटलैंड्स कहते हैं, हमारी धरती के लिए कितनी जरूरी हैं।
World Wetlands Day 2026 : हर साल 2 फरवरी को पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस (वर्ल्ड वैटलैंट्स डे) मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पानी से भरी जमीनें, जिन्हें हम आर्द्रभूमि यानी वैटलैंड्स कहते हैं, हमारी धरती के लिए कितनी जरूरी हैं। बच्चों के लिए यह जानना बहुत रोचक है कि ये जगहें सिर्फ कीचड़ या बेकार जमीन नहीं, बल्कि जीवन से भरी रंगीन दुनिया हैं।
आर्द्रभूमि क्या होती है ?
आर्द्रभूमि वे स्थान होते हैं जहां पानी हमेशा या साल के कुछ समय तक मौजूद रहता है। यहां जमीन और पानी दोस्त बनकर रहते हैं। झीलें, तालाब, दलदल, झील के किनारे की जमीन, नदियों के मुहाने, मैंग्रोव के जंगल और यहां तक कि धान के खेत भी आर्द्रभूमि के उदाहरण हैं। सरल शब्दों में कहें तो जहां पानी जमीन को गीला रखे और वहां खास पौधे व जीव रहते हों, वही आर्द्रभूमि है।
आर्द्रभूमि क्यों जरूरी हैं ?
आर्द्रभूमियों हमारी धरती की धड़कन हैं। ये हमें पानी, भोजन, हवा और सुंदरता देती हैं। ये हमारी धरती के सुपरहीरो हैं जो चुपचाप बहुत सारे काम करती हैं ।
पानी की सफाई
आर्द्रभूमि प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती हैं। गंदे पानी को साफ करने में ये मदद करती हैं।
बाढ़ से सुरक्षा
जब ज्यादा बारिश होती है, तो आर्द्रभूमि अतिरिक्त पानी को सोख लेती हैं। इससे बाढ़ का खतरा कम होता है।
पक्षियों का घर
हजारों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर उड़कर आर्द्रभूमियों में आते हैं। गौरैया, सारस, लेमिंगो, बतख सबको ये जगह बहुत पसंद है।
मछलियों और मेंढकों की नर्सरी
कई मछलियां अपने अंडे यहीं देती हैं। मेंढक और कछुए भी यहीं पनपते हैं।

जलवायु संतुलन
आर्द्रभूमि धरती को ठंडा रखने और कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने में मदद करती हैं।
कुछ रोचक तथ्य
दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत प्रजातियां किसी न किसी रूप में आर्द्रभूमियों पर निर्भर हैं।
भारत की चिलिका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
एक स्वस्थ आद्र्रभूमि में हजारों प्रकार के कीड़े, मछलियां और पौधे रहते हैं।
धान के खेते भी एक तरह की मानव-निर्मित आर्द्रभूमि है।
प्रवासी पक्षी साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से उड़कर भारत की आर्द्रभूमियों में आते हैं।
भारत की प्रसिद्ध आद्र्र्रभूमियां
भारत में आद्र्र्रभूमियों की भरमार है। कुछ खास हैं—
चिलिका झील (ओडिशा) - प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग।
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) - पक्षी प्रेमियों की पसंद।
वे बनाड झील (केरल) - केरल की जीवनरेखा।
लोकटक झील (मणिपुर) - तैरते हुए द्वीप (फुमदी) के लिए प्रसिद्ध।
सुंदरबन मैंग्रोव (पश्चिम बंगाल) - रॉयल बंगाल टाइगर का घर।
आर्द्रभूमियां खतरे में क्यों हैं ?
आज आद्र्रभूमियां कई समस्याओं से जूझ रही हैं।
शहरों का फैलाव
प्लास्टिक और कचरे का लगातार बढ़ता प्रदूषण
तालाबों को पाटकर इमारतें बनाना
पानी की बर्बादी
जलवायु परिवर्तन
अगर आर्द्रभूमियों खत्म होंगी तो पक्षी, मछलियां और अंत में हम इंसान भी प्रभावित होंगे।
क्यों मनाते हैं विश्व आर्द्रभूमि दिवस ?
विश्व आद्र्रभूमि दिवस हमें यह सिखाता है कि पानी की हर बूंद और हर गीली जमीन की कद्र करना ही सच्ची समझदारी है। 2 फरवरी, 1971 को ईरान के रामसर शहर में एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था, जिसे रामसर कन्वेंशन कहते हैं। इसका उद्देश्य दुनिया भर की आर्द्रभूमियों की रक्षा करना है। उसी दिन की याद में हर साल विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। जनवरी 2026 तक, भारत में 96 नामित रामसर साइटें (अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वैटलैंड्स) हैं। विश्व स्तर पर, रामसर नेटवर्क में 2,550 से ज्यादा साइटें शामिल हैं। एशिया में भारत में सबसे ज्यादा रामसर साइटें हैं, जिसमें तमिलनाडु 20 साइटों के साथ देश में सबसे आगे है।

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