Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Jan, 2026 10:57 AM
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और सृजन का उत्सव है। यह वही पावन दिन माना जाता है, जब प्रकृति पीले वस्त्र धारण कर नए आरंभ का संदेश देती है और मां सरस्वती के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार,...
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और सृजन का उत्सव है। यह वही पावन दिन माना जाता है, जब प्रकृति पीले वस्त्र धारण कर नए आरंभ का संदेश देती है और मां सरस्वती के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा से अध्ययन, करियर और रचनात्मक क्षेत्रों में विशेष लाभ प्राप्त होता है।
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी तिथि और शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
बसंत पंचमी 2026 की तिथि
पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, सुबह 02:28 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात्रि 01:46 बजे
पर्व तिथि: 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
इस दिन प्रातः काल में सरस्वती पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना गया है।

सरस्वती पूजा से पहले की तैयारी
बसंत पंचमी पर पूजा से पहले कुछ आवश्यक तैयारियां करना लाभकारी माना गया है:
प्रातः सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ हों। पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
पूजा के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या शांत स्थान चुनें। पीले वस्त्र पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मान्यता है कि मां सरस्वती को स्वच्छता, शांति और सात्विक वातावरण अत्यंत प्रिय है।
घर में सरस्वती पूजा की विधि
पूजा का आरंभ दीप प्रज्वलन और संकल्प से करें। मां सरस्वती को चंदन, अक्षत, पीले पुष्प अर्पित करें। पुस्तकों, कॉपियों, कलम और वाद्य यंत्रों को पूजा स्थल के पास रखें। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सरस्वती वंदना या स्तुति का पाठ करें। पूजा के दौरान घर में शोर-शराबा या अव्यवस्था न होने दें। ऐसा माना जाता है कि इस विधि से की गई पूजा से विद्या और विवेक की विशेष प्राप्ति होती है।
सरस्वती पूजा की सामग्री सूची
मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र, पीले वस्त्र, दीपक और घी/तेल, धूप, चंदन, अक्षत (चावल), पीले फूल, नैवेद्य (खीर, मीठे चावल, बूंदी या पीले मिष्ठान्न), पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र।
भोग, मंत्र और पूजा में सावधानियां
मां सरस्वती को सात्विक भोग अर्पित करें।
तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूरी रखें।
मंत्र जाप के लिए “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” या सरस्वती वंदना का पाठ करें।
पूजा में क्रोध, जल्दबाजी और आलस्य से बचें।
बच्चों को पूजा में शामिल करना शुभ माना गया है।
पूजा के बाद क्या करें और क्या न करें
बसंत पंचमी पर क्या करें
पूजा के बाद अध्ययन, लेखन या संगीत अभ्यास करें।
छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार करना शुभ माना जाता है।
पीले वस्त्र, फल या अनाज का दान करें।
जरूरतमंदों की सहायता करें।
बसंत पंचमी पर क्या न करें
पुस्तकों का अपमान न करें और उन्हें जमीन पर न रखें।
इस दिन बाल कटवाने से बचें।
अनावश्यक विवाद और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रहें।
बसंत पंचमी 2026 मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। नियमपूर्वक और श्रद्धा से की गई पूजा ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मक ऊर्जा को प्रबल करती है। इस दिन लिया गया संकल्प जीवन को सकारात्मक दिशा देने में सहायक सिद्ध होता है।
