BAFTA जीतने वाली फिल्म ‘बूंग’ की स्क्रिप्ट पढ़कर चौंक गए थे निर्माता शुजात सौदागर, बोले- 'पहले कभी...'

Edited By Updated: 11 Mar, 2026 04:55 PM

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​​​​​​​हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में BAFTA अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म ‘बूंग’ के मेकर्स ने इस बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाया और फिल्म के निर्माण से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए।

नई दिल्ली। हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में BAFTA अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म ‘बूंग’ के मेकर्स ने इस बड़ी उपलब्धि का जश्न मनाया और फिल्म के निर्माण से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। इस मौके पर चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर शुजात सौदागर और फिल्म की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी समेत पूरी टीम मौजूद रही। सभी ने फिल्म की कहानी, इसकी स्क्रिप्ट और इसे पर्दे तक लाने के सफर पर खुलकर बातचीत की।

स्क्रिप्ट पढ़कर हैरान रह गए थे शुजात सौदागर
प्रोड्यूसर शुजात सौदागर ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार ‘बूंग’ की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो वह पूरी तरह चौंक गए थे। उनके मुताबिक, इससे पहले उन्होंने किसी किरदार के नजरिए से इतनी अलग और अनोखी कहानी नहीं पढ़ी थी। उन्होंने कहा,
'मैंने इससे पहले ऐसा कुछ नहीं पढ़ा था, खासकर किसी किरदार के नजरिए से इतनी अलग तरह से देखी गई कहानी। बड़े होने के साथ-साथ हम समाज और अपने माहौल की वजह से एक तय दायरे में बंधने लगते हैं और कहीं न कहीं अपना बचपन खो देते हैं।' सौदागर ने आगे कहा कि उन्हें इस कहानी में सबसे ज्यादा बूंग के किरदार की निडरता ने आकर्षित किया। उनका मानना है कि फिल्म की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी और इस किरदार के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने कहा, मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि लक्ष्मीप्रिया देवी ही बूंग हैं और बूंग ही लक्ष्मीप्रिया देवी हैं।'

संस्कृति को पर्दे पर लाना चाहती थीं लक्ष्मीप्रिया देवी
फिल्म की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी ने बताया कि ‘बूंग’ के जरिए उनका मकसद अपने बचपन के मणिपुर को दुनिया के सामने लाना था। उन्होंने कहा कि वह उस मणिपुर को दिखाना चाहती थीं जो अपनी संस्कृति, संगीत और पारंपरिक पहनावे से गहराई से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, 'मैं अपने बचपन वाले मणिपुर को वापस लाना चाहती थी, जो अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ था। मैं चाहती थी कि फिल्म में वहां का संगीत और कपड़े वैसे ही रहें, ताकि इसके जरिए मणिपुर की पहचान की एक छाप छोड़ी जा सके।'

निजी अनुभवों से निकली ‘बूंग’ की कहानी
लक्ष्मीप्रिया देवी ने यह भी खुलासा किया कि ‘बूंग’ की स्क्रिप्ट किसी पारंपरिक कहानी की तरह नहीं लिखी गई थी। बल्कि यह उनके निजी अनुभवों से निकली एक भावनात्मक यात्रा थी। उन्होंने कहा, 'मैंने इसे एक डायरी की तरह लिखा था, इसलिए इसके सीन पहले से ही मेरे अनुभवों का हिस्सा थे। इसकी कोई एक लाइन की कहानी नहीं थी; यह बस मेरे अनुभवों का एक सैलाब था जो कागज पर उतर आया।'

फिल्म फेस्टिवल्स में मिली जबरदस्त सराहना
लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘बूंग’ को एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म ने दुनिया के कई बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में शानदार सफर तय किया और अपनी सच्ची व भावनात्मक कहानी के लिए खूब तारीफ बटोरी। फेस्टिवल्स में मिली इस सराहना के बाद अब यह फिल्म 6 मार्च 2026 को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज़ की गई है, जहां दर्शक इसे बड़े पर्दे पर देखने का मौका पा रहे हैं।

 

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