Exclusive Interview: पी.ओ.के. की पीड़ा और भारत से जुड़ने की चाह दिखाएगी फिल्म- अनूप जलोटा

Edited By Updated: 19 Aug, 2026 12:14 PM

exclusive interview of anup jalota and aadarsh jain with punjab kesari

फिल्म के बारे में आदर्श जैन और अनूप जलोटा ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देशभक्ति की भावना और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहने वाले लोगों के दर्द को पर्दे पर उतारने वाली फिल्म ‘भारत देश है मेरा’ अब दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है। निर्देशक आदर्श जैन और पद्मश्री अनूप जलोटा इस फिल्म के जरिए वहां के लोगों की जिंदगी, उनकी परेशानियों और भारत से जुड़ने की भावनाओं को एक संवेदनशील कहानी के रूप में पेश कर रहे हैं। फिल्म 21 अगस्त को रिलीज होगी। फिल्म के बारे में आदर्श जैन और अनूप जलोटा ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...


सवाल: आप लंबे समय से संगीत और भजन की दुनिया में सक्रिय हैं। फिर अभिनय की तरफ आपका रुझान कैसे हुआ?

मैं बहुत पहले से अभिनय करता आ रहा हूं। मैंने ‘पाताल लोक’ में सत्य साईं बाबा का किरदार निभाया था। इसके अलावा ‘चिंतामणि’, ‘सूरदास’ और ‘प्यार का सावन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। मेरे लिए अभिनय कोई प्रोफेशन नहीं, बल्कि आराम जैसा है। लगातार कार्यक्रम और संगीत के बीच अगर कुछ दिन शूटिंग पर चला जाऊं, तो मेरा शेड्यूल बदल जाता है और मुझे इससे एक तरह का ब्रेक मिल जाता है।

सवाल: जब मौलाना लुक में तस्वीर वायरल हुई तो क्या उसी के बाद आपकी फिल्म में एंट्री हुई?

हां, तस्वीर वायरल होने के बाद आदर्श ने कहा कि जब फोटो वायरल हो ही गई है तो क्यों न आप फिल्म में एक्टिंग भी कर लें। मैंने उनसे पहले पूरी कहानी सुनने को कहा। जब उन्होंने स्क्रिप्ट सुनाई तो मुझे लगा कि यह एक ऐसी कहानी है, जिस पर पहले इस तरह की फिल्म नहीं बनी। फिल्म में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में रहने वाले लोगों की परेशानियों और उनकी स्थिति को दिखाया गया है। वहां के लोगों की आवाज है कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं। इसी भावना से ‘भारत देश है मेरा’ का विचार सामने आता है।

सवाल: क्या आपको लगता है कि Gen Z इस फिल्म से जुड़ पाएगी?

आज की Gen Z को जानकारी चाहिए, लेकिन कई चीजों की जानकारी उनके पास नहीं है। PoK में क्या हो रहा है, वहां के लोग किन परिस्थितियों में रह रहे हैं, यह जानना जरूरी है। जब युवा यह देखेंगे कि वहां के लोग भी भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं, तो उन्हें इस विषय को समझने का मौका मिलेगा। हमें लगता है कि देश और कश्मीर के बारे में युवाओं को जानकारी मिलनी चाहिए।

सवाल: फिल्म में हिंदू-मुस्लिम एकता का पहलू भी नजर आता है। क्या आपको लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री में कभी धर्म के आधार पर भेदभाव हुआ है?

फिल्म इंडस्ट्री में मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। मुस्लिम कलाकारों और तकनीशियनों ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को बहुत आगे बढ़ाया है। नौशाद साहब, जावेद अख्तर साहब, दिलीप कुमार साहब जैसे कई बड़े नाम हैं। सभी ने भारतीय सिनेमा में शानदार योगदान दिया है। फिल्म इंडस्ट्री में अलग-अलग जगहों और समुदायों से लोग आए और उन्होंने मिलकर इसे आगे बढ़ाया।

सवाल: ए. आर. रहमान को लेकर आपके हालिया बयान पर आप क्या कहना चाहेंगे?

ए. आर. रहमान को बहुत कुछ मिला है। उन्हें ऑस्कर मिला, कई फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले। ये सब उन्हें उनकी प्रतिभा के आधार पर मिला। भारत में मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी बहुत सम्मान मिला है। हमारे देश में मुस्लिम राष्ट्रपति रहे हैं और मुस्लिम लोगों को भारत रत्न जैसे सम्मान भी मिले हैं। इसलिए यह कहना कि किसी को सिर्फ धर्म की वजह से फिल्में नहीं मिल रही हैं, मैं इससे सहमत नहीं हूं।


आदर्श जैन 

सवाल: अनूप जलोटा को मौलाना के किरदार में लेने का विचार आपके मन में कैसे आया?

सबसे पहले मैंने फिल्म की कहानी के हिसाब से एक गाना रिकॉर्ड किया था। उस समय पूरी स्टारकास्ट तय नहीं हुई थी। मुझे लगा कि यह गाना अनूप जी से बेहतर कोई नहीं गा सकता। जब उन्होंने गाना रिकॉर्ड किया तो मेरे मन में विचार आया कि क्यों न इन्हीं पर फिल्म बनाई जाए। हमने उनकी दाढ़ी लगाकर मुस्लिम लुक में तस्वीर ली और वह तस्वीर लीक होकर काफी वायरल हो गई। इसके बाद लगा कि जब तस्वीर इतनी चर्चा में आ रही है तो अनूप जी को फिल्म में ही लिया जाए।


सवाल: फिल्म में पहलगाम समेत कश्मीर से जुड़े आतंकी हमलों को भी दिखाया गया है। क्या यह फिल्म की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है?

जी हां। फिल्म में कश्मीर और PoK की परिस्थितियों को दिखाया गया है। हमने कुछ ऐसे दृश्य भी शूट किए थे, जिनमें वहां के लोगों की आवाज दबाने और उनके साथ होने वाले अत्याचार को दिखाया गया है। कुछ घटनाएं ऐसी भी हुईं, जो फिल्म में सीन शूट करने के बाद वास्तविक जीवन में देखने को मिलीं। इसलिए हमें लगा कि कहानी में दिखाई गई परिस्थितियां काफी हद तक वास्तविकता से जुड़ती हैं।

 

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