अच्छे बोल व संगीत के बिना अच्छा किरादर नहीं बन सकता, हमारे गाने सालों बाद भी जिंदा रहेंगे: विजय वर्मा

Edited By Updated: 27 Nov, 2025 11:12 AM

exclusive interview of gustaakh ishq cast with punjab kesari

फिल्म के बारे में विजय वर्मा, फातिमा सना शेख ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फैशन जगत में अपनी ख़ास पहचान बनाने वाले मनीष मल्होत्रा अब एक अनोखी प्रेम कहानी को सिल्वर स्क्रीन पर पेश करने के लिए तैयार हैं। उनकी होम प्रोडक्शन फिल्म ‘गुस्ताख इश्क’, जिसे दर्शक लंबे समय से बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। ट्रेलर और लुक ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। विभु पुरी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में संगीत का जादू रचा है विशाल भारद्वाज ने, वहीं गीतों को अपने शब्द दिए हैं गुलज़ार ने। नसीरुद्दीन शाह, विजय वर्मा, फातिमा सना शेख और शारिब हाशमी जैसे उम्दा कलाकारों से सजी ‘गुस्ताख इश्क’ 28 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फिल्म के बारे में विजय वर्मा, फातिमा सना शेख ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश... 


विजय

सवाल: कोविड के बाद आपकी फिल्म थिएटर में रिलीज हो रही है आपके लिए कितनी बड़ी बात है?
जवाब:
बहुत बड़ी बात है। पिछली थिएटर रिलीज पैंडेमिक से पहले आई थी। पांच साल लोगों के घर पर OTT से मिला हूं। अब उम्मीद है कि वे थिएटर तक जरूर आएंगे। दर्शक थिएटर तक आकर मेरे काम को प्यार दें यही बहुत बड़ी बात है।


सवाल: ट्रेलर में गुलजार साहब के लिरिक्स और विशाल भारद्वाज का म्यूज़िक इतने बड़े नाम जुड़ जाएं तो कैसा लगता है?
जवाब:
एक सेंस ऑफ सेफ्टी है बहुत अच्छा लगता है बड़ी टीम है अच्छे लोग हैं तो काम आसान हो जाता है। अच्छे बोल, अच्छा संगीत बिना इसके अच्छा किरदार बन ही नहीं सकता।
लोग रोज हमारे गाने सुन रहे हैं। ये गाने 20–25 साल बाद भी जिंदा रहेंगे।

फातिमा

सवाल: फिल्म में आपका लुक बेहद खूबसूरत है और उसमें पुरानी दुनिया का एक खास चार्म है। आपके लिए सबसे ज़्यादा क्या एक्साइटिंग रहा?
जवाब:
मुझे मनीष मल्होत्रा जी ने कॉल किया 15 मिनट में स्क्रिप्ट भेज दी। पता चला विजय है तो और खुशी हुई। स्क्रिप्ट प्यारी, सरल, इंटेंस और खूबसूरत थी। ये मेरी पहली लव स्टोरी है literally forever के बाद। फिल्म का माहौल इतना प्यारा था विजय ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। शुरू के कुछ दिन मैं नर्वस थी लेकिन उन्होंने हाथ पकड़कर कॉन्फिडेंस दिया। नसीर जी के साथ काम करना तो वरदान जैसा है।


सवाल: दंगल जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के बाद एक एक्टर की लाइफ आसान हो जाती है या मुश्किल?
जवाब:
अवसर मिलना आसान हो जाता है। पहले मैं half decent काम भी कर लेती थी। अब पोजिशन है कि ना बोल सकती हूं। लोगों ने काम देखा है इज्जत मिली है। दंगल एक significant फिल्म थी जिसने मुझे पहचान दी। तो आप जब एक अच्छी और बड़ी फिल्म का हिस्सा होते हैं शुरुआत में तो आपके लिए कई रास्ते खुल जाते हैं। 


सवाल: नसीरुद्दीन शाह जी को लोग ‘संस्था’ कहते हैं। आप दोनों ने उनके साथ काम करके क्या अनुभव किया?

विजय: वह हमेशा कहते हैं कि वह किसी विशेष प्रतिभा का नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास का परिणाम हैं। उनका काम बिल्कुल सटीक, पूरी तैयारी के साथ और निर्दोष होता है। चार पन्नों का संवाद उन्होंने एक ही टेक में बोल दिया सेट पर लोग भावुक होकर रो पड़े। भाषा पर उनकी पकड़ अद्भुत है।

फातिमा: हां, वह अभ्यास, निष्ठा और ईमानदारी का जीवंत उदाहरण हैं।


सवाल: आपकी फिल्म हमें पुराने जमाने की याद दिलाती है। पहले क्या होता था जो अब नहीं होता?

विजय : मोबाइल फोन नहीं थे। मिस कॉल कल्चर था। खत लिखे जाते थे। घर से निकल कर हर 10 मिनट में लोकेशन अपडेट नहीं देते थे। पावर कट हो जाता था तो तारे देखते थे।

फातिमा: और सबर ज़्यादा था लोगों में। आईएसडी कॉल्स के लिए लाइनें लगती थीं। लाल रंग के बूथ होते थे।

 

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