Freedom at Midnight Season 2 Review: इतिहास के पन्नों में लिखी दिलों और अपनों के बंटवारे की कहानी

Updated: 11 Jan, 2026 12:08 PM

freedom at midnight season 2 review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है सीरीज फ्रीडम एट मिडनाइट सीजन 2

सीरीज: फ्रीडम एट मिडनाइट सीजन 2 (Freedom at Midnight Season 2)
निर्देशक- निखिल आडवाणी (Nikkhil Advani )
कलाकार- सिद्धांत गुप्ता (Sidhant Gupta), चिराग वोहरा (Chirag Vohra), राजेंद्र चावला (Rajendra Chawla), ल्यूक मैकगिबनी (Luke McGibney), कॉर्डेलिया बुगेजा (Cordelia Bugeja), आरिफ ज़करिया (Arif Zakaria), पवन चोपड़ा (Pawan Chopra), इरा दुबे (Ira Dubey)
रेटिंग: 3.5 स्टार

Freedom at Midnight Season 2: SonyLIV की वेब सीरीज़ Freedom at Midnight Season 2 भारत के इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर को पर्दे पर लाने की एक गंभीर कोशिश है। निर्देशक निखिल आडवाणी ने इस सीज़न में आज़ादी और बंटवारे के समय की सच्चाई को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया है। यह सीरीज़ सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि उस दौर में लोगों ने जो दर्द, डर और बिछड़ने का गम झेला, उसे भी सामने लाती है।

कहानी 
इस सीज़न की कहानी उस समय की है जब भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तय हो रही थीं। देश आज़ादी की खुशी मना ही रहा था कि उसी समय बंटवारे का दर्द हर तरफ फैल गया। दंगे, खून-खराबा, लोग अपने ही घरों से बेघर हो गए। लाखों लोगों को अपने परिवार, अपने शहर और अपनी जड़ों से दूर होना पड़ा।


सीरीज़ यह भी दिखाती है कि उस वक्त देश की हालत कितनी खराब थी और आम इंसान किन हालात से गुजर रहा था। कहानी में महात्मा गांधी जी की भूमिका को खास जगह दी गई है। कैसे उन्होंने हिंसा रोकने की कोशिश की, लोगों को शांति का रास्ता दिखाया और आखिर में उनकी भावुक और दर्दनाक मौत का दृश्य इस सीज़न को और भी असरदार बना देता है।

एक्टिंग 
सीरीज़ के सभी कलाकारों ने शानदार काम किया है। हर किरदार असली लगता है। इतिहास की किताबों में जिन चेहरों को हमने सिर्फ पढ़ा था, यहां वे जिंदा इंसानों की तरह सामने आते हैं, जिनकी अपनी मजबूरियां और गलतियां हैं। खासकर गांधी जी से जुड़े सीन दिल को छू जाते हैं और आखिरी दृश्य दर्शकों को भावुक कर देता है।

निर्देशन और रिव्यू 
सीरीज का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया है सीरीज का निर्देशन काफी सधा हुआ है। Freedom at Midnight Season 2 एक आसान काम नहीं करता। बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे को दिखाना हमेशा जोखिम भरा होता है, लेकिन यह सीरीज़ इसे सम्मान और समझदारी के साथ पेश करती है। हालांकि कुछ जगहों पर मेकर्स की अपनी सोच झलकती है और सीरीज़ पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, फिर भी यह दर्शकों को बांधे रखती है। यह सीरीज़ सिर्फ इतिहास नहीं दिखाती, बल्कि उस दर्द को महसूस कराती है जिसे लोगों ने सच में जिया था।

अगर आप भारत के इतिहास को समझना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आज़ादी की कीमत कितनी भारी थी, तो Freedom at Midnight Season 2 ज़रूर देखनी चाहिए। यह सीरीज़ आपको सोचने पर मजबूर करती है, भावुक करती है और याद दिलाती है कि दो देशों का बंटवारा सिर्फ ज़मीन का नहीं, दिलों का भी था।

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