Edited By Mansi,Updated: 14 Feb, 2026 06:56 PM

यहां पढ़ें कैसी है तापसी पन्नू की फिल्म अस्सी
फिल्म: Assi (अस्सी)
कलाकार : तापसी पन्नू (Taapsee Pannu), कनी कुश्रुति (Kani Kusruti), जीशान अयूब (Zeeshan Ayyub), कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra) , मनोज पाहवा (Manoj Pahwa), रेवती (Revathi)
निर्देशक :अनुभव सिन्हा (Anubhav Sinha)
रेटिंग: 4*
Assi: अनुभव सिन्हा और तापसी पन्नू की जोड़ी जब भी साथ आती है, सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि बहस का मुद्दा बन जाता है। ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ के बाद अब ‘अस्सी’ एक ऐसे विषय को उठाती है जो असहज भी है और बेहद जरूरी भी। टी-सीरीज के बैनर तले बनी यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक कोर्टरूम ड्रामा है या फिर समाज की उस सच्चाई को सामने लाती है जिससे हम अक्सर नजरें चुरा लेते हैं? आइए जानते हैं कैसी है फिल्म अस्सी।
कहानी
फिल्म का शीर्षक अस्सी होना एक वजह है जो भारत में हर दिन होने वाले 80 रेप मामलों की ओर इशारा करता है। कहानी की बात करें तो ये परिमा (कानी कुस्रुति) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक स्कूल टीचर है और अपने पति विनय (जीशान अयूब) और बच्चे के साथ दिल्ली में सुकून भरी जिंदगी जी रही होती है। लेकिन एक रात उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है, जब कुछ युवक उसका अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करते हैं और उसे मरने के लिए छोड़ देते हैं।

परिमा बच जाती है, आरोपी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन असली लड़ाई अदालत में शुरू होती है। अपराधियों में से एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता है, जो कानून को मोड़ने की कोशिश करता है। वकील रावी (तापसी पन्नू) परिमा का केस लड़ती है, पर ठोस सबूतों की कमी न्याय की राह को मुश्किल बना देती है। फिल्म इसी संघर्ष को संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ पेश करती है। अब क्या वह परिमा को इंसाफ दिला पाएंगी ये जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी।
एक्टिंग
कानी कुस्रुति इस फिल्म की आत्मा हैं। उन्होंने परिमा के दर्द, डर और अंदरूनी टूटन को बेहद सधी हुई अभिव्यक्ति से जिया है। कई दृश्यों में उनका मौन संवादों से ज्यादा प्रभाव छोड़ता है।
तापसी पन्नू एक बार फिर वकील के किरदार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती हैं। तापसी का अभिनय एक बार फिर प्रभावी साबित हुआ है। अद्विक जायसवाल जो एक बच्चा है उसका अभिनय तारीफ के काबिल है इसके साथ ही फिल्म के बाकी सभी कलाकार काफी अनुभवी है सभी ने अपनी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभाया है।

निर्देशन और लेखन
अनुभव सिन्हा का निर्देशन फिल्म को अतिनाटकीय होने से बचाता है। कोर्टरूम दृश्यों में वास्तविकता झलकती है जहां शोर-शराबे की बजाय कानून की प्रक्रिया पर फोकस है। यही सादगी फिल्म को अलग बनाती है।

लेखक गौरव सोलंकी की लेखनी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। संवाद सीधे और तीखे हैं, लेकिन बिना किसी अनावश्यक नाटकीयता के।
रिव्यू
संक्षेप में कहें तो अस्सी आसान फिल्म नहीं है, लेकिन जरूरी फिल्म जरूर है। यह सिर्फ एक केस की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां सच जानते हुए भी न्याय तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। अगर आप गंभीर और विचारोत्तेजक सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है।