ग्वालियर से नेशनल अवॉर्ड तक, कार्तिक आर्यन ने मेहनत से लिखा सफलता का नया अध्याय

Edited By Updated: 21 Jul, 2026 11:51 AM

gwalior dreams received national recognition kartik aaryan hard work pays off

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे कार्तिक आर्यन आज बॉलीवुड के सबसे सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे कार्तिक आर्यन आज बॉलीवुड के सबसे सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और चाहते थे कि बेटा भी मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाए, लेकिन कार्तिक का सपना फिल्मों में अभिनय करना था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मुंबई आने के बाद उन्होंने डी.वाई. पाटिल कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ चुपचाप ऑडिशन देना शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा और संघर्ष के दौर में उन्होंने किराए के फ्लैट में अन्य लोगों के साथ रहकर अपने सपनों को जिंदा रखा।

'प्यार का पंचनामा' से मिली पहचान, लगातार हिट फिल्मों ने बनाया स्टार
करीब तीन साल के संघर्ष के बाद वर्ष 2011 में कार्तिक आर्यन को 'प्यार का पंचनामा' मिली। फिल्म में उनका लंबा मोनोलॉग दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ और उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली। हालांकि इसके बाद 'आकाश वाणी' और 'कांची' जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 'सोनू के टीटू की स्वीटी', 'लुका छुपी', 'पति पत्नी और वो' और 'भूल भुलैया 2' जैसी सफल फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद युवा सितारों में शामिल कर दिया। खासतौर पर कोविड-19 महामारी के बाद 'भूल भुलैया 2' की सफलता ने उन्हें हिंदी सिनेमा का बैंकएबल स्टार साबित किया।

'चंदू चैंपियन' के लिए किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन
अपने करियर में नई चुनौती स्वीकार करते हुए कार्तिक ने निर्देशक कबीर खान की फिल्म 'चंदू चैंपियन' चुनी, जो भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित है। इस किरदार के लिए उन्होंने करीब 18 किलो वजन घटाया, महीनों तक कठिन ट्रेनिंग की और खुद को एक एथलीट की तरह तैयार किया। फिल्म में उनके दमदार अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें पहले फिल्मफेयर अवॉर्ड और अब 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला। यह उनके करियर का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार है, जिसे उन्होंने मलयालम सुपरस्टार ममूटी के साथ साझा किया।

लाखों युवाओं के लिए बने प्रेरणा का प्रतीक
कार्तिक आर्यन की सफलता केवल एक अभिनेता की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। बिना किसी फिल्मी गॉडफादर के उन्होंने अपनी मेहनत, धैर्य और प्रतिभा के दम पर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मान तक का सफर तय किया। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और अपने सपनों पर विश्वास के साथ किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!