Exclusive Interview: लोग फिल्म देखकर अपने खानपान पर दोबारा सोचने को मजबूर होंगे: चेतन डी. के.

Edited By Updated: 12 Jul, 2026 11:46 AM

kajal agarwal and chetan dk exclusive interview with

फिल्म द इंडिया स्टोरी के बारे में काजल अग्रवाल और डायरेक्टर चेतन डीके ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देशभर में खाने-पीने की चीजों में मिलावट, रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों पर आधारित फिल्म 'द इंडिया स्टोरी’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म में काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म को  चेतन डीके द्वारा डायरेक्ट किया गया है। फिल्म द इंडिया स्टोरी के बारे में काजल अग्रवाल और डायरेक्टर चेतन डीके ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

चेतन डीके

सवाल: फिल्म की टैगलाइन 'Slow Poison in Progress' काफी प्रभावशाली है। इस विषय पर फिल्म बनाने का विचार कैसे आया?

चेतन: इस फिल्म के लेखक और निर्माता सागर जी कुछ अलग और सार्थक विषय पर काम करना चाहते थे। इसी दौरान उनके एक करीबी दोस्त के करीब सात साल के बेटे की कैंसर से मौत हो गई। डॉक्टरों और जांच के दौरान यह बात सामने आई कि लंबे समय तक जहरीले रसायनों और दूषित खाद्य पदार्थों के संपर्क में रहने की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ती गई। यही घटना हमारे लिए सबसे बड़ा झटका थी। इसके बाद हमने इस विषय पर गंभीर रिसर्च शुरू की। रिसर्च के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने हमें अंदर तक हिला दिया। पंजाब की 'कैंसर ट्रेन' हो या केरल के कासरगोड जैसे इलाके, जहां रासायनिक पदार्थों के असर से लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हुए इन सबने हमें एहसास कराया कि इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। तभी हमने तय किया कि इस विषय पर फिल्म बनाई जानी चाहिए।

सवाल: फिल्म का नाम ‘द इंडिया स्टोरी’  क्यों रखा गया? यह सिर्फ भारत की कहानी क्यों?

चेतन: बेशक यह समस्या पूरी दुनिया में मौजूद है लेकिन हमारी पहली जिम्मेदारी अपने देश के लोगों के प्रति है। हम चाहते थे कि सबसे पहले भारत में इस मुद्दे पर चर्चा हो और लोग जागरूक हों। अगर इस फिल्म का कोई दूसरा नाम होता तो शायद 'घर-घर की कहानी' भी उपयुक्त होता, क्योंकि आज यह समस्या लगभग हर परिवार से जुड़ चुकी है। हमारा उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि लोगों को सोचने पर मजबूर करना है।

सवाल: आपकी रिसर्च में क्या यह भी सामने आया कि बढ़ती बीमारियों और अचानक हार्ट अटैक जैसी घटनाओं के पीछे भी खानपान की भूमिका हो सकती है?

चेतन: हम डॉक्टर नहीं हैं, इसलिए किसी बीमारी का सीधा कारण बताना उचित नहीं होगा। लेकिन हमारी रिसर्च में यह जरूर सामने आया कि खाने-पीने की चीजों में अत्यधिक कीटनाशकों और रसायनों का इस्तेमाल हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हर व्यक्ति जाने-अनजाने ऐसे रसायनों के संपर्क में आ रहा है। यही वजह है कि हमने फिल्म के जरिए लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित भोजन, जैविक खेती और जागरूक उपभोक्ता बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

सवाल: किसानों की भूमिका और उनकी समस्याओं को आप किस नजरिए से देखते हैं?

चेतन: मेरा मानना है कि किसान जानबूझकर लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। कई बार उन्हें भी यह पूरी जानकारी नहीं होती कि जिन रसायनों का इस्तेमाल वे कर रहे हैं, उनके दुष्परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। कंपनियां अधिक उत्पादन का लालच देती हैं और किसान उसी पर भरोसा कर लेते हैं। जरूरत इस बात की है कि किसानों को सही जानकारी मिले, उन्हें उचित दाम मिले और सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कदम उठाए। अगर किसान को उसकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा तो वह बेहतर और सुरक्षित खेती करने के लिए भी प्रेरित होगा।


काजल अग्रवाल
सवाल: जब आपने फिल्म की कहानी सुनी तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी? अपने किरदार की तैयारी कैसे की?

काजल अग्रवाल: जब मैंने कहानी सुनी तो मुझे महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हम सभी की जिंदगी से जुड़ा हुआ विषय है। आज हम क्या खा रहे हैं अपने बच्चों को क्या खिला रहे हैं और हमारी रोजमर्रा की चीजों में कितना मिलावट का खतरा है यह सोचकर ही डर लगता है। निर्देशक चेतन जी ने जब रिसर्च से जुड़ी जानकारियां मेरे साथ साझा कीं तो मैं वास्तव में हैरान रह गई। मुझे लगा कि इस तरह की फिल्म का हिस्सा बनना सिर्फ एक कलाकार के तौर पर नहीं बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी जरूरी है। मेरा किरदार एक मजबूत और जागरूक महिला का है इसलिए इसे निभाना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद संतोषजनक भी रहा।

सवाल: रिसर्च के दौरान ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया?

काजल अग्रवाल: मुझे सबसे ज्यादा झटका दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट से जुड़ी जानकारी ने दिया। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर को पूरा करने के लिए किस तरह कृत्रिम तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है यह जानकर मैं काफी चिंतित हो गई। इसके बाद मैंने अपने घर में दूध पीना लगभग बंद कर दिया। हम दूध से बने उत्पादों का सीमित उपयोग करते हैं, लेकिन सीधे दूध का सेवन नहीं करते। इसके अलावा पनीर में भी मिलावट और नकली उत्पादों के इस्तेमाल की जानकारी काफी परेशान करने वाली थी। एक मां होने के नाते मैं हमेशा कोशिश करती हूं कि अपने बच्चे को जितना संभव हो, सुरक्षित और भरोसेमंद भोजन ही दूं।

सवाल: आज के समय में लोग अक्सर पूछते हैं कि आखिर खाएं क्या? क्या आपको लगता है कि हमें फिर से पारंपरिक खेती और घरेलू उत्पादन की ओर लौटना चाहिए?

काजल अग्रवाल: मेरे हिसाब से जो लोग ऐसा कर सकते हैं, उन्हें जरूर करना चाहिए। अगर घर में कुछ फल-सब्जियां उगाई जा सकती हैं तो इससे जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है। सिर्फ 'ऑर्गेनिक' लिखे होने से कोई चीज पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती। कई बार यह सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा भी होता है। इसलिए जरूरी है कि हम जितना हो सके, भरोसेमंद स्रोतों से खाद्य सामग्री लें और अपनी पारंपरिक खेती और खानपान की ओर लौटने की कोशिश करें।

सवाल: आपकी आने वाली फिल्म 'रामायण' को लेकर भी दर्शकों में काफी उत्साह है। इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना आपके लिए कितना खास रहा?

काजल अग्रवाल: यह मेरे करियर के सबसे बड़े और खास प्रोजेक्ट्स में से एक है। बचपन से हम सभी ने दूरदर्शन पर रामायण देखी है और उससे भावनात्मक जुड़ाव रहा है। आज उसी कहानी का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है। यह फिल्म वैश्विक स्तर पर बनाई जा रही है ताकि भारतीय संस्कृति और हमारी कहानियां पूरी दुनिया तक पहुंच सकें। मुझे पूरा विश्वास है कि दर्शकों को यह अनुभव पसंद आएगा।

सवाल: आखिर में दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है?

चेतन: हमने इस फिल्म को सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी के साथ बनाया है। हमारी कोशिश है कि लोग फिल्म देखने के बाद अपने खानपान और जीवनशैली के बारे में गंभीरता से सोचें और जागरूक बनें।

काजल अग्रवाल: मैं सभी दर्शकों से यही कहना चाहूंगी कि यह फिल्म पूरे दिल और मेहनत से बनाई गई है। इसे अपने परिवार के साथ जरूर देखें और इसके संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। अगर इस फिल्म के जरिए थोड़ी भी जागरूकता फैलती है तो हमारी मेहनत सफल मानी जाएगी।

 

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