Exclusive Interview: 'नागबंधम' में नागा साधु बनना मेरे लिए आध्यात्मिक यात्रा रही: विराट कर्णा

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 05:47 PM

nagbandham starcast exclusive interview with punjab kesari

फिल्म के बारे में विराट कर्णा,नभा नटेश, ऋषभ साहनी और निशिता नागिरेड्डी ने सीरीज के बारे में डायरेक्टर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। साउथ सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'नागबंधम' का दमदार ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। तेलुगू में बनी इस फिल्म को पैन इंडिया स्तर पर कई भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। एक्शन, एडवेंचर और फैंटेसी से भरपूर यह फिल्म भारत के प्राचीन विष्णु मंदिरों से जुड़े रहस्यमयी अनुष्ठान 'नागबंधम' और उससे जुड़ी पौराणिक दंतकथाओं को बड़े पर्दे पर पेश करती है। फिल्म 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म के बारे में विराट कर्णा,नभा नटेश, ऋषभ साहनी और निशिता नागिरेड्डी ने सीरीज के बारे में डायरेक्टर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...


विराट कर्णा

प्रश्न: आपके साथ शुरुआत करते हैं। नाग साधु जैसे किरदार को निभाने का अनुभव कैसा रहा और आपने इस फिल्म के लिए हां क्यों कहा?

यह मेरे लिए लाइफटाइम एक्सपीरियंस रहा है। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में बार-बार ऐसा किरदार निभाने का मौका मिलता है। नाग साधु का किरदार सिर्फ अभिनय नहीं था, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी था। इस रोल को निभाते-निभाते मैं खुद भी काफी आध्यात्मिक हो गया। ऐसा महसूस होता था कि कोई दिव्य शक्ति हर समय हमारा साथ दे रही है। शायद यही वजह है कि फिल्म का कंटेंट और उससे जुड़ी हर चीज लोगों तक इतनी मजबूती से पहुंच रही है। यह किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है।


प्रश्न: क्या शूटिंग के दौरान कभी ऐसा लगा कि अब आप विराट नहीं, बल्कि पूरी तरह अपने किरदार में जी रहे हैं?

बिल्कुल। हर दिन सेट पर पहुंचते ही वही एहसास होने लगता था। वहां का माहौल, ऊर्जा और पूरी प्रक्रिया मुझे किरदार में और गहराई से ले जाती थी। मैं वैसे भी हर किरदार को पूरी ईमानदारी से जीने की कोशिश करता हूं, लेकिन इस किरदार के साथ जुड़ाव कुछ अलग ही था। मुझे सच में लगता था कि कोई दिव्य ऊर्जा मेरा मार्गदर्शन कर रही है। मैंने इस किरदार को सिर्फ एक्ट नहीं किया, बल्कि उसे जिया है।

प्रश्न: अपने किरदार से आपने सबसे बड़ी सीख क्या ली?

सबसे बड़ी सीख यही मिली कि जब भी किसी सही बात या किसी अपने के लिए खड़े होना हो, तो पूरी मजबूती और ईमानदारी से खड़े रहना चाहिए। अगर हमें किसी पर विश्वास है तो अंत तक उसका साथ निभाना चाहिए।

नभा नटेश

प्रश्न: फिल्म में आपका किरदार पार्वती का है। इस किरदार को निभाने का अनुभव कैसा रहा? आपने इसके लिए कैसी तैयारी की?

सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि मेरे किरदार का नाम पार्वती जरूर है, लेकिन यह माता पार्वती का किरदार नहीं है। जब मैंने पहली बार अपने किरदार का नाम सुना तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे लगता है कि यह मेरे करियर के सबसे खूबसूरती से लिखे गए किरदारों में से एक है। इतने बड़े स्तर की फिल्म में किसी महिला किरदार को इतनी मजबूती और गहराई के साथ लिखा जाना बहुत कम देखने को मिलता है। मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे इस फिल्म का हिस्सा बनने और ऐसे किरदार को निभाने का अवसर मिला।

अभी दर्शकों ने सिर्फ कुछ गाने और मेरे किरदार की झलक देखी है। लेकिन जब पूरी फिल्म देखेंगे, तब उन्हें पता चलेगा कि पार्वती कितनी लेयर्ड और मजबूत महिला है। कहानी में उसका हर फैसला आगे चलकर बड़ा असर डालता है। वह सिर्फ मौजूद रहने वाला किरदार नहीं है, बल्कि पूरी कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।


प्रश्न: पार्वती और नभा में कितनी समानता है और कितना फर्क?

यह काफी गहरा सवाल है। हर अभिनेता अपने किरदार में अपनी कुछ भावनाएं और अपनी सोच जरूर शामिल करता है। शायद मेरे अंदर भी पार्वती का कुछ हिस्सा था, लेकिन इस फिल्म के बाद मैंने पार्वती से बहुत कुछ सीखा भी है। अपने प्रियजनों के लिए मजबूती से खड़े रहना, मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानना और अपने फैसलों पर अडिग रहना ये बातें मैंने इस किरदार से अपने जीवन में अपनाई हैं।

प्रश्न: क्या यह आपकी पहली पौराणिक फिल्म है?

जी हां। हालांकि मैं एक और पीरियड फिल्म ‘स्वयंवर’ भी कर रही हूं, लेकिन दोनों का विषय बिल्कुल अलग है। ‘नागबंधम’ सिर्फ पौराणिक फिल्म नहीं है। इसमें एडवेंचर, इतिहास और पीरियड ड्रामा का भी शानदार मेल है।


प्रश्न: सुना है कि एक चोट की वजह से आपको लगभग दो साल फिल्मों से दूर रहना पड़ा था। वह समय कितना कठिन था?

नभा नटेश: शुरुआत में वह समय बहुत मुश्किल था। मैं लगातार फिल्में कर रही थी और अचानक चोट लगने के बाद मुझे लंबा ब्रेक लेना पड़ा। मानसिक रूप से भी वह दौर काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि यह समय खुद को दोबारा मजबूत बनाने के लिए जरूरी था। मैंने अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि उन दो वर्षों ने मुझे इंसान के रूप में भी बेहतर बनाया और कलाकार के रूप में भी काफी परिपक्व किया। अब मैं जिंदगी और सिनेमा दोनों को पहले से बिल्कुल अलग नजरिए से देखती हूं। इसलिए आज मुझे लगता है कि वह समय मेरे लिए एक आशीर्वाद साबित हुआ।


ऋषभ साहनी

प्रश्न: आपका लुक बेहद दमदार नजर आ रहा है। आपके किरदार की तैयारी कैसी रही?

ऋषभ साहनी: मेरा पूरा लुक निर्देशक अभिषेक सर की सोच और विजन का नतीजा है। उन्होंने पहले से तय कर रखा था कि इस किरदार को किस तरह दिखाना है।
मैंने अहमद शाह अब्दाली के बारे में काफी पढ़ाई की। मेरी कोशिश यही थी कि मैं उसके हर फैसले और हर सोच के पीछे की वजह समझ सकूं। मैंने अपनी डायरी में उसके बैकस्टोरी और कई परिस्थितियां लिखीं ताकि मैं उसके मनोविज्ञान को समझ सकूं। फिजिकली भी काफी मेहनत की। फिल्म में दो अलग-अलग किरदार होने की वजह से पहले करीब सात-आठ किलो वजन बढ़ाया और फिर उतना ही वजन कम किया।इसके अलावा तलवारबाजी सीखी, घुड़सवारी की ट्रेनिंग ली और तेलुगु भाषा में संवाद भी सीखे। तेलुगु सीखना थोड़ा मुश्किल जरूर था, लेकिन उतना ही मजेदार भी था। 

प्रश्न: तेलुगु संवाद बोलने का अनुभव कैसा रहा?
कई बार इमोशनल सीन होते थे और मैं पूरी गंभीरता से तेलुगु में डायलॉग बोल रहा होता था, लेकिन सामने वाले लोग हंसने लगते थे। फिर मुझे भी हंसी आ जाती थी। हालांकि मैंने पूरी कोशिश की कि संवाद सही तरीके से बोलूं। अब तो एक-दो डायलॉग आज भी याद हैं।

निशिता नागिरेड्डी 

प्रश्न: आपकी नजर में नागबंधम को बाकी फिल्मों से अलग क्या बनाता है?

इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी है। यह इतिहास की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। मुगलों का आक्रमण, हमारे पूर्वजों के साथ हुई घटनाएं ये सब हमारे इतिहास और साहित्य का हिस्सा हैं। हमने उन्हीं घटनाओं को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत किया है ताकि दर्शकों को एक शानदार कमर्शियल सिनेमाई अनुभव मिल सके। लेकिन सबसे बड़ा आकर्षण फिल्म के विजुअल्स और आर्टवर्क हैं। दर्शकों को ऐसे दृश्य देखने को मिलेंगे, जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखे होंगे।


प्रश्न: ट्रेलर में वीएफएक्स यह सब बेहद वास्तविक लग रहा था। क्या इसमें आपकी भी कोई विशेष भूमिका रही?

यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। आमतौर पर निर्देशक सिर्फ वीएफएक्स टीम को बताते हैं कि उन्हें कैसा दृश्य चाहिए, फिर कई बार बदलाव होते हैं और आखिर में जो संभव होता है, उसी पर सहमति बनती है। लेकिन हमारे निर्देशक को तकनीकी जानकारी इतनी अच्छी है कि उन्हें पहले से पता होता है कि किस तरह का इनपुट देने से मनचाहा आउटपुट मिलेगा। इसलिए हमें किसी तरह का समझौता नहीं करना पड़ा। उन्होंने जो कल्पना की थी, वही स्क्रीन पर दिखाई दे रही है।

प्रश्न: फिल्म को लेकर दर्शकों के लिए कोई संदेश देना चाहेंगे।

नभा नटेश: ‘नागबंधम’ 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। मैं सभी दर्शकों से कहना चाहूंगी कि अपने परिवार और दोस्तों के साथ थिएटर जरूर आइए। यह ऐसी फिल्म है जो आपको कुछ घंटों के लिए आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से बिल्कुल अलग एक नई दुनिया में ले जाएगी।

ऋषभ साहनी: आप सभी ने ट्रेलर देखा है और हमें भी उसे देखकर रोंगटे खड़े हो गए थे। हमें खुशी है कि ट्रेलर को दर्शकों का शानदार प्यार मिला। अब उम्मीद है कि आप सभी फिल्म को भी सिनेमाघरों में उतना ही प्यार देंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

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