'सोनू के टीटू की स्वीटी' से कार्तिक आर्यन के आइकॉनिक डायलॉग्स, जो आज भी ज़ेहन में बसे हैं

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 03:04 PM

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सोनू के रूप में कार्तिक आर्यन के तीखे, बेबाक और बेहद रिलेटेबल इन डायलॉग्स ने दोस्ती और प्यार की उस सच्चाई को सामने रखा, जिसे मेनस्ट्रीम बॉलीवुड ने बेहद कम साफ़गोई से दिखाया है।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। रिलीज़ के 8 साल बाद भी 'सोनू के टीटू की स्वीटी' पॉप-कल्चर में अपनी मज़बूत मौजूदगी बनाए हुए है और इसका बड़ा श्रेय जाता है कार्तिक आर्यन के उन यादगार डायलॉग्स को, जो उन्होंने सोनू के किरदार में बोले थे।

सोनू के रूप में कार्तिक आर्यन के तीखे, बेबाक और बेहद रिलेटेबल इन डायलॉग्स ने दोस्ती और प्यार की उस सच्चाई को सामने रखा, जिसे मेनस्ट्रीम बॉलीवुड ने बेहद कम साफ़गोई से दिखाया है। हालांकि लेखक द्वारा लिखे गए इन लाइनों को खास बनाया कार्तिक के बोलने के अंदाज़ ने।नॉर्मल बातचीत के अंदाज़ में बोले गए यह डायलॉग इस कदर अंदर से चुभने वाले हैं, इसे आप खुद सुनकर जान सकते हैं। सच कहें तो ये डायलॉग्स स्क्रिप्टेड कम और देर रात की लगातार मेहनत का सबूत हैं, जो कार्तिक ने इसे मुकम्मल बनाने में लगाए।

गौरतलब है कि 'सोनू के टीटू की स्वीटी'  में जहाँ बाकी किरदार चुप रहते थे, वहीं सोनू असहज सच्चाइयाँ खुलकर कह देता था और यही वजह थी कि दर्शक उससे तुरंत जुड़ गए। तो आइए जानते हैं 'सोनू के टीटू की स्वीटी' के पाँच आइकॉनिक डायलॉग्स हैं, जो आज भी उतने ही कोट किए जाते हैं:

1. “इस दुनिया के हर ch#iye को लगता है कि उसकी वाली अलग है… और तेरे मुँह से ये ‘अलग है’ सुनकर मुझे यक़ीन हो गया है कि ‘L’ लगने वाले हैं।” यह एक कड़वा-सच है, जो मीम बनकर हर जगह छा गया।

2. “दो साल में, चौबीस महीनों में, 104 हफ्तों में, 102 हफ्ते रुलाया है इसने… एक हफ्ता पर साल की खुशी का एवरेज कौन-सी रिलेशनशिप में होता है?”
   इसमें सोनू की लॉजिक, निर्दयता के साथ बहस से परे है।

3. “भाई प्यार में लोग अंधे हो जाते हैं… ch#iye नहीं हो जाते।” 
   यह न सिर्फ सीधा, बल्कि  बेधड़क और फिल्म के टोन को परिभाषित करता हुआ डायलॉग है।

4. “मैं तुझे उतनी ही गहरी खाई में कूदने दे सकता हूँ, जितनी मेरे पास रस्सी हो।”
   इस डायलॉग में दोस्ती में छुपी चेतावनी है, जो कम शब्दों में बहुत कुछ कहती है।

5. “तेरे खाने से लेकर कपड़ों से लेकर टूथपेस्ट तक, सब वो चुनती है। अच्छा-खासा कोलगेट चल रहा था बचपन से। हर्बल के चक्कर में दिन भर मुँह में मिट्टी-सी फीलिंग आती है।”
इस डायलॉग में घरेलू झुंझलाहट है, जो पॉप-कल्चर गोल्ड बन गई।

दिलचस्प बात यह है कि आज भी ये डायलॉग्स मीम्स, रील्स और नॉस्टैल्जिक पोस्ट्स में बार-बार लौट आते हैं। आठ साल बाद भी 'सोनू के टीटू की स्वीटी' के ये डायलॉग हमारे दिमाग़ में वैसे ही बसे हैं, और ये सिर्फ़ हमारा मनोरंजन नहीं करते, बल्कि हक़ीक़त बयां करते हैं।

 

 

 

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