Edited By Reetu sharma,Updated: 08 Jan, 2026 04:52 PM

राजस्थान की माटी से एक ऐसी दहाड़ उठी है जिसने अश्लीलता के इस साम्राज्य की नींव हिला दी है। राजस्थान के जांबाज पुलिस अफसर हिमांशु सिंह राजावत अपनी फिल्म 'सागवान' के साथ 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में उतर रहे हैं।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सिनेमा के पर्दे पर अक्सर शब्दों के मायने बदल दिए जाते हैं, लेकिन इस बार मामला आर-पार की जंग का है। पिछले कई सालों से 'सागवान' शब्द का नाम आते ही करोड़ों लोगों के जेहन में भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव का वह चर्चित गाना गूँजता था- 'टूट जाई राजा जी पलंग सागवान के"। 50 करोड़ (500 Million) से ज्यादा व्यूज बटोरने वाले इस गाने ने 'सागवान' जैसी मजबूत लकड़ी को बेडरूम की अश्लीलता और फूहड़ता का पर्याय बना दिया था।
लेकिन अब राजस्थान की माटी से एक ऐसी दहाड़ उठी है जिसने अश्लीलता के इस साम्राज्य की नींव हिला दी है। राजस्थान के जांबाज पुलिस अफसर हिमांशु सिंह राजावत अपनी फिल्म 'सागवान' के साथ 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में उतर रहे हैं। यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भोजपुरी इंडस्ट्री द्वारा परोसी गई फूहड़ता को राजस्थान का करारा जवाब है।
पलंग बनाम पुलिस का डंडा: परिभाषा बदलने की जंग
जहाँ भोजपुरी गानों में 'सागवान' का इस्तेमाल द्विअर्थी संवादों और सस्ते मनोरंजन के लिए किया गया, वहीं राजावत की फिल्म में 'सागवान' का मतलब है इंसाफ का डंडा। यह फिल्म उन रीयल केस फाइलों पर आधारित है, जहाँ सुदूर जंगलों में अंधविश्वास के नाम पर मासूमों की बलि दी गई। हिमांशु सिंह राजावत ने साबित कर दिया है कि 'सागवान' का असली काम पलंग तोड़ना नहीं, बल्कि उन अपराधियों की हड्डियाँ तोड़ना है जो समाज में डायन-प्रथा और बलि जैसे पाखंड फैलाते हैं।
25 साल बाद राजस्थानी सिनेमा का 'शंखनाद'
राजस्थानी सिनेमा, जो पिछले ढाई दशक से एक बड़े धमाके के इंतजार में था, अब इस फिल्म के जरिए पुनर्जीवित हो रहा है। बिना किसी नंगेपन, बिना किसी गाली-गलौज और बिना किसी सस्ते 'मसाले' के, इस फिल्म ने सेंसर बोर्ड से भी भारी वाहवाही बटोरी है। यह उन फिल्मकारों के चेहरे पर तमाचा है जो दावा करते हैं कि अश्लीलता के बिना फिल्में हिट नहीं होतीं।
वर्दी का दर्द और रीयल लोकेशन्स
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका 'Raw & Real' होना है। फिल्म में राजस्थानी कलाकारों ने ही काम किया है और इसे उन्हीं लोकेशन्स पर शूट किया गया है जहाँ ये घटनाएं असल में घटी थीं। राजावत जी के अनुसार, "पुलिस की चार्जशीट सिर्फ कोर्ट तक जाती है, लेकिन यह फिल्म समाज की उस 'सोच' को जेल भेजेगी जो अपराधी पैदा करती है।"
16 जनवरी को होगा महा-धमाका
सोशल मीडिया पर अब बहस छिड़ गई है कि आखिर दर्शक किस 'सागवान' को चुनेंगे? 500 मिलियन व्यूज वाली अश्लीलता को या खाकी के उस स्वाभिमान को जो समाज सुधारने निकला है? फिल्म के ट्रेलर ने पहले ही इंटरनेट पर आग लगा दी है और अब लोगों को इंतजार है 16 जनवरी 2026 का, जब सिनेमाघरों में 'सागवान' का असली शंखनाद होगा। यह फिल्म राजस्थान के संस्कारों और गौरव की वह जीत है, जो अश्लीलता के दौर में एक नई मशाल जलाएगी।