Edited By Reetu sharma,Updated: 12 May, 2026 05:18 PM

भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी हमेशा से सिनेमा रहा है। कभी Raj Kapoor की फिल्मों ने रूस में लोगों का दिल जीता था, तो वहीं Mithun Chakraborty की लोकप्रियता वहां आज भी मिसाल मानी जाती है।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी हमेशा से सिनेमा रहा है। कभी Raj Kapoor की फिल्मों ने रूस में लोगों का दिल जीता था, तो वहीं Mithun Chakraborty की लोकप्रियता वहां आज भी मिसाल मानी जाती है। अब यही रिश्ता एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां दोनों देश केवल फिल्मों को पसंद नहीं कर रहे, बल्कि मिलकर नई कहानियां भी गढ़ रहे हैं।
भारत में बढ़ रहा रूस का सिनेमाई निवेश
रूस का प्रमुख मीडिया समूह Gazprom-Media Holding अब भारत में बड़े स्तर पर फिल्म और सीरीज प्रोजेक्ट्स विकसित कर रहा है। यह साझेदारी सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाती है। इस सहयोग के तहत कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें महान कलाकार अन्ना पावलोवा और निकोलस रोएरिख से प्रेरित फिल्में शामिल हैं। इन दोनों हस्तियों का भारत से गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध रहा है।
मुंबई से जोधपुर तक शूट हुई रूसी फिल्म
इस साझेदारी का एक दिलचस्प प्रोजेक्ट म्यूजिकल कॉमेडी 'पर्सिमन ऑफ माई लव' है, जिसकी शूटिंग मुंबई, उदयपुर और जोधपुर में हुई है। यह फिल्म रूसी इमोशनल स्टोरीटेलिंग और भारतीय सिनेमा की भव्यता को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
जयपुर बना रूसी फैंटेसी वर्ल्ड का नया घर
इस पूरे सहयोग के केंद्र में फिल्म निर्माता Nila Madhab Panda हैं, जिन्होंने गैज़प्रोम-मीडिया होल्डिंग के साथ चार बड़े प्रोजेक्ट्स की साझेदारी की है। इनमें सबसे चर्चित फैंटेसी ड्रामा सीरीज़ “चेल्याबिंस्क राजा” है, जिसकी शूटिंग इस समय जयपुर में हो रही है। राजस्थान की शाही हवेलियां, रंगीन संस्कृति और ऐतिहासिक लोकेशन्स अब एक रूसी फैंटेसी दुनिया का हिस्सा बन रही हैं।
नॉर्दर्न लाइट्स में दिखेगा भारतीय सिनेमा का जादू
दूसरी तरफ नीला माधब पांडा की फिल्म 'चेज़िंग नॉर्दर्न लाइट्स' रूस के खूबसूरत मुरमान्स्क क्षेत्र में शूट की जाएगी। खास बात यह है कि फिल्म की पृष्ठभूमि दुनिया की सबसे खूबसूरत प्राकृतिक घटनाओं में से एक नॉर्दर्न लाइट्स होंगी। यह प्रतीकात्मक भी है कि जहां रूस जयपुर की पिंक सिटी में अपना नया सिनेमाई घर खोज रहा है, वहीं भारतीय कहानी कहने की कला अब आर्कटिक के सुदूर इलाकों तक पहुंच रही है।
‘ये फिल्में नहीं, दो संस्कृतियों के प्रेम पत्र हैं’
गैज़प्रोम-मीडिया होल्डिंग के डिप्टी सीईओ बोरिस खांचाल्यान ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती रचनात्मक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दोनों देशों की साझेदारी अब रणनीतिक स्तर तक पहुंच चुकी है। वहीं नीला माधब पांडा ने इस सहयोग को “दो संस्कृतियों के बीच प्रेम पत्र” बताया। उनके मुताबिक, आज की विभाजित दुनिया में ऐसी कहानियां जरूरी हैं जो भावनाओं, संगीत और मानवीय रिश्तों के जरिए लोगों को जोड़ सकें।
सिनेमा बन रहा नई सांस्कृतिक कूटनीति का हथियार
यह साझेदारी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि आज के दौर में सिनेमा कैसे सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर का मजबूत माध्यम बन चुका है। कहानी कहने की कला अब देशों के बीच ऐसा पुल बन रही है जो भाषा, राजनीति और सीमाओं से भी बड़ा साबित हो रहा है।
वैश्विक मंच पर बढ़ेगा भारत-रूस सहयोग
सिर्फ सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सह-निर्माण, साझा वितरण नेटवर्क और प्रतिभा आदान-प्रदान के जरिए दोनों देश वैश्विक मनोरंजन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में फिल्म निर्माता नीला माधब पांडा को 2026 के 29वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में बतौर स्पीकर आमंत्रित किया गया है, जहां वे सांस्कृतिक पहचान, रचनात्मक उद्योग और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।