Edited By Mansi,Updated: 23 Jul, 2026 04:03 PM
फिल्म: उत्तर दा पुत्तर (Uttar the puttar)
कलाकार: अन्नू कपूर (Annu Kapoor), रुखसार रहमान (Rukhsar Rehman), Jeeveshu Ahluwali, बृजेंद्र काला (Brijendra Kala), पवन मल्होत्रा (Pavan Malhotra), जीवेशु अहलूवालिया (Jeeveshu Ahluwalia), सुमित गुलाटी (Sumit Gulati) आदि
निर्देशक: रविंदर सिवाच (Ravinder Siwach)
रेटिंग: 3 स्टार
उत्तर दा पुत्तर: क्या एक पढ़ा-लिखा इंसान विज्ञान पर भरोसा करने के बजाय वास्तु और अंधविश्वास को अपनी जिंदगी का आधार बना सकता है? फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' इसी दिलचस्प विचार को कॉमेडी और इमोशन के साथ पेश करती है। फिल्म एक ऐसे प्रोफेसर की कहानी है, जो फिजिक्स पढ़ाता है लेकिन अपनी निजी जिंदगी के फैसले वास्तु और शुभ-अशुभ के हिसाब से लेता है। निर्देशक रविंदर सिवाच ने एक साधारण विषय को मजेदार अंदाज में पेश करने की कोशिश की है, जिसमें हंसी के साथ-साथ सोचने के लिए भी कुछ बातें हैं।
कहानी
फिल्म की कहानी साई राम टुटेजा (अन्नू कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पेशे से फिजिक्स प्रोफेसर हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि घर की सही दिशा, वास्तु नियम और छोटे-छोटे टोटके जिंदगी की हर परेशानी को दूर कर सकते हैं। लेकिन नए घर में शिफ्ट होने के बाद उनकी सोच को बड़ा झटका लगता है, जब गृह प्रवेश के तुरंत बाद एक हादसा हो जाता है और उनके ससुर व साले घायल हो जाते हैं। इस घटना के बाद उनकी पत्नी गिन्नी (रुखसार रहमान) उनसे नाराज होकर घर छोड़ देती हैं।

इसके बाद साई राम की जिंदगी एक नए सफर पर निकल पड़ती है, जहां वह अपने दोस्त मन्नू (बृजेंद्र काला) के साथ कई अजीब परिस्थितियों और नए लोगों से मिलते हैं। कहानी में आने वाले अलग-अलग किरदार फिल्म को मजेदार बनाते हैं और दर्शकों को लगातार बांधे रखते हैं।
डायरेक्शन
निर्देशक रविंदर सिवाच ने अपनी पहली फिल्म के लिए एक अलग और मनोरंजक विषय चुना है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरल कहानी और सहज प्रस्तुति है। निर्देशक ने कोशिश की है कि कॉमेडी परिस्थितियों से पैदा हो, न कि जबरदस्ती के मजाक से।

संदीप कपूर की पटकथा में दिल्ली की लोकल भाषा, वहां की संस्कृति और आम लोगों की सोच को अच्छे तरीके से शामिल किया गया है। फिल्म बिना किसी भारी संदेश के मनोरंजन के जरिए अंधविश्वास और तर्क के बीच का फर्क दिखाती है। हालांकि कहानी कुछ जगहों पर और गहराई हासिल कर सकती थी, लेकिन इसका हल्का-फुल्का अंदाज इसकी खासियत बना रहता है।
एक्टिंग
अन्नू कपूर फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। साई राम टुटेजा के किरदार में उनकी कॉमिक टाइमिंग, बॉडी लैंग्वेज और संवाद बोलने का अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आता है। उन्होंने एक सामान्य इंसान के किरदार को अपनी अदाकारी से खास बना दिया है।रुखसार रहमान ने पत्नी के किरदार में संतुलित अभिनय किया है और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस प्रभाव छोड़ती है। बृजेंद्र काला अपनी स्वाभाविक कॉमेडी से कई दृश्यों को यादगार बना देते हैं।
पवन मल्होत्रा हमेशा की तरह अपने किरदार में प्रभावशाली नजर आते हैं। जीवेशु अहलूवालिया, इश्तियाक खान, नितिन अरोड़ा, राजेंद्र सेठी और सुमित गुलाटी जैसे कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। फिल्म की मजबूत सपोर्टिंग कास्ट इसकी कहानी को और बेहतर बनाती है।
फाइनल वर्डिक्ट
'उत्तर दा पुत्तर' एक ऐसी फिल्म है जो बिना बड़े एक्शन या भारी-भरकम ड्रामा के अपनी सादगी से दर्शकों को जोड़ने की कोशिश करती है। फिल्म हंसाती है, कुछ भावुक पल देती है और साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाती है कि इंसान की जिंदगी में फैसले किस्मत से ज्यादा उसकी सोच और कर्म तय करते हैं।
दिल्ली का देसी माहौल, साफ-सुथरी कॉमेडी, मजेदार किरदार और अन्नू कपूर का शानदार अभिनय इसे एक अच्छी फैमिली एंटरटेनर बनाते हैं। अगर आप हल्की-फुल्की और परिवार के साथ देखने लायक फिल्म की तलाश में हैं, तो 'उत्तर दा पुत्तर' एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।