गुजरात सरकार ने दंगों से जुड़े सबूत मामले में पूर्व डीजीपी श्रीकुमार की याचिका का विरोध किया

Edited By Updated: 23 May, 2023 09:37 AM

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अहमदाबाद, 22 मई (भाषा) गुजरात सरकार ने 2002 के सांप्रदायिक दंगों के संबंध में निर्दोष लोगों को फंसाने और राज्य को बदनाम करने के लिए सबूत गढ़ने के आरोपी पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर बी श्रीकुमार की याचिका का सोमवार को विरोध किया।

अहमदाबाद, 22 मई (भाषा) गुजरात सरकार ने 2002 के सांप्रदायिक दंगों के संबंध में निर्दोष लोगों को फंसाने और राज्य को बदनाम करने के लिए सबूत गढ़ने के आरोपी पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर बी श्रीकुमार की याचिका का सोमवार को विरोध किया।

पूर्व डीजीपी ने याचिका में स्वयं को आरोपमुक्त किए जाने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी डी ठक्कर की अदालत को बताया कि श्रीकुमार गोधरा दंगों में निर्दोष लोगों के लिए मृत्युदंड की सजा को लेकर झूठे सबूत गढ़ने की आपराधिक साजिश का हिस्सा थे।

मामले में श्रीकुमार के अलावा कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी संजीव भट्ट सह-आरोपी हैं।

सरकार ने अदालत में कहा कि वर्ष 2002 के गुजरात दंगों की जांच करने वाले नानावती आयोग के समक्ष उनके (श्रीकुमार) हलफनामों का कथन दिवंगत पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी द्वारा दायर विरोध याचिका के समान था। जकिया जाफरी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट के खिलाफ याचिका दायर की थी।

पूर्व डीजीपी (खुफिया) श्रीकुमार ने 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड के दौरान सशस्त्र इकाई के प्रभारी के रूप में कार्य किया। उन्होंने मामले में आरोपमुक्त किए जाने की दलील देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।

संजीव भट्ट की ओर से पेश वकील मनीष ओझा ने मामले के तथ्यों पर चर्चा करने के लिए अपने मुवक्किल से मिलने की अनुमति का अनुरोध करते हुए एक अर्जी दाखिल की है। उन्होंने दावा किया कि मामले में तथ्यों और कानून पर आधारित कुछ बिंदु हैं जो केवल उन्हें ज्ञात हैं।

ओझा ने कहा कि हिरासत में मौत के मामले में गुजरात के बनासकांठा जिले के पालनपुर की एक जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे भट्ट को अभी तक अदालत में पेश नहीं किया गया है।

अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा द्वारा सीतलवाड़, श्रीकुमार और भट्ट के खिलाफ जून 2022 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जब उच्चतम न्यायालय ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को गोधरा साम्प्रदायिक दंगे से संबंधित मामलों में पूर्व में एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था और 21 सितंबर, 2022 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। सीतलवाड़ और श्रीकुमार फिलहाल अंतरिम जमानत पर हैं।



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