ईरान जंग में रूस की जबरदस्त एंट्री ! अमेरिका से मुकाबले की प्लानिंग, विदेश मंत्री लावरोव पहुंचे चीन

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 05:27 PM

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Sergei Lavrov चीन दौरे पर जा रहे हैं, जहां China और Russia United States की होरमुज नाकेबंदी और Iran संकट पर रणनीति बनाएंगे, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका है।

International Desk: ईरान (Iran) और अमेरिका (United States) के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच अब Russia ने भी सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिए हैं।  रूस के विदेश मंत्री Sergei Lavrov चीन पहुंच गए हैं, जहां वे China के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और Strait of Hormuz पर अमेरिका की नाकेबंदी को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) मंगलवार को चीन (China) की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका (United States) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट बढ़ गया है।

 

यह यात्रा चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों देशों के नेता पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट, खासकर Iran और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव पर चर्चा करेंगे। China और Russia के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, जिन्हें उनके नेताओं Xi Jinping और Vladimir Putin “नो लिमिट्स पार्टनरशिप” बता चुके हैं। दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। इस बैठक में खास तौर पर इस बात पर चर्चा होगी कि अमेरिका की नाकेबंदी का मुकाबला कैसे किया जाए और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को कैसे सुरक्षित रखा जाए।

 

चीन लंबे समय से ईरान से तेल आयात करता रहा है, भले ही उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हों। ऐसे में होरमुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का सीधा असर चीन की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, चीन रूस से भी बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता है, जिससे दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी और मजबूत हो गई है।चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे और एक संयुक्त रणनीति तैयार करने की कोशिश करेंगे। रूस और चीन की यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए अहम मानी जा रही है। होरमुज संकट और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर इन दोनों देशों की रणनीति आने वाले समय में दुनिया की दिशा तय कर सकती है।
 

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