Edited By Pardeep,Updated: 18 Aug, 2026 09:04 PM

जिस उम्र में अधिकांश किशोर अपने करियर के विकल्पों की खोज कर रहे होते हैं, उस उम्र में 16 वर्षीय लक्ष्मणन मेय्यप्पन ने पेशेवर लेखांकन (प्रोफेशनल अकाउंटिंग) की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है।
दुबई: जिस उम्र में अधिकांश किशोर अपने करियर के विकल्पों की खोज कर रहे होते हैं, उस उम्र में 16 वर्षीय लक्ष्मणन मेय्यप्पन ने पेशेवर लेखांकन (प्रोफेशनल अकाउंटिंग) की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। मेय्यप्पन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने दुबई में मात्र 16 साल और 141 दिन की उम्र में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
कोविड लॉकडाउन में मां की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर
लक्ष्मणन के वित्त (फाइनेंस) के क्षेत्र में आने की कहानी काफी दिलचस्प है। यह यात्रा कोविड-19 महामारी के दौरान तब शुरू हुई, जब उन्होंने अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पूरी की थी। उनकी मां, जो स्वयं भी एक एसीसीए (ACCA) हैं, ने उन्हें लॉकडाउन के दौरान लेखांकन की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराया। मां से मिली इस प्रेरणा के बाद उन्होंने स्वयं भी यह योग्यता हासिल करने का निर्णय लिया। मात्र 15 वर्ष की आयु में, उन्होंने ACCA योग्यता के लिए अध्ययन शुरू किया और लगभग एक वर्ष में इसे पूरा कर लिया।
CFA चार्टर और दुबई की कंपनी में वरिष्ठ पद
इतनी कम उम्र में ACCA पूरा करना उनकी शैक्षणिक यात्रा का अंत नहीं था। मेय्यप्पन ने इसके बाद चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (CFA) चार्टर भी प्राप्त किया और वर्तमान में वे फाइनेंस में एमएससी (MSc) कर रहे हैं। अपनी काबिलियत के दम पर वे वर्तमान में दुबई की वित्तीय फर्म सेंचुरी फाइनेंशियल में एक वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक (Senior Research Analyst) के रूप में कार्यरत हैं, जहां उनका काम निवेश, अनुसंधान और वित्तीय बाजारों में निर्णय लेने से संबंधित है।
सीखने की जिज्ञासा है सफलता की कुंजी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मिली इस ऐतिहासिक मान्यता पर लक्ष्मणन मेय्यप्पन का कहना है, "यह उपलब्धि मेरे लिए बहुत मायने रखती है, लेकिन मैंने कभी भी योग्यता हासिल करने को एक दौड़ के रूप में नहीं लिया। मेरे लिए महत्वपूर्ण यह समझना था कि वास्तविक दुनिया में वित्त कैसे काम करता है। जब सीखना गति के बजाय जिज्ञासा से प्रेरित होता है, तो परिणाम कहीं अधिक सार्थक होता है।"