Edited By Pardeep,Updated: 26 Jun, 2026 01:22 AM

वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार शाम को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो क्रमिक झटकों ने पूरे देश को दहला दिया, जिससे अब तक 188 लोगों की मौत हो चुकी है।
काराकस: वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार शाम को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो क्रमिक झटकों ने पूरे देश को दहला दिया, जिससे अब तक 188 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है क्योंकि 200 से अधिक लोग अब भी मलबे में फंसे हुए हैं।

ला गुएरा बना 'आपदा क्षेत्र'
भूकंप का सबसे घातक असर राजधानी काराकस के उत्तर में स्थित तटीय इलाके ला गुएरा में देखा गया है, जिसे सरकार ने "आपदा क्षेत्र" घोषित कर दिया है। यहां दर्जनों इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गई हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश में आपातकाल की घोषणा की और बताया कि इस प्राकृतिक आपदा में 1,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं और इतने ही लोग बेघर हो गए हैं।

ठप हुई सेवाएं, स्कूल बने राहत शिविर
भूकंप के कारण देश का प्रमुख सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे विमानों का परिचालन पूरी तरह बंद है। इसके अलावा सुरक्षा कारणों से मेट्रो और गैस आपूर्ति सेवाएं भी रोक दी गई हैं। प्रशासन ने स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया है और उनके भवनों का उपयोग राहत शिविरों व सहायता केंद्रों के रूप में किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
इस भीषण त्रासदी के बाद दुनिया भर से मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं। अमेरिका ने तत्काल खोज दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भेजने की घोषणा की है। कतर से बचाव दल पहले ही रवाना हो चुके हैं जबकि मैक्सिको और अल साल्वाडोर से भी टीमें जल्द पहुंचने वाली हैं।

एक मिनट के अंतराल पर आए दो बड़े झटके
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था जिसका केंद्र मोरोन के पश्चिम में था। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। इन झटकों का असर इतना व्यापक था कि 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी इमारतों को खाली कराना पड़ा।
फिलहाल, बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए कटर और अन्य उपकरणों की मदद से दिन-रात जुटे हुए हैं। हजारों लोग अपने घरों के क्षतिग्रस्त होने के डर से पार्कों और खुली जगहों पर रात बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी हेक्टर रिकी ने आपबीती बताते हुए कहा, "धीरे-धीरे सब हिलना शुरू हुआ और फिर इतना बढ़ गया कि हमें जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागना पड़ा"।