चार साल बाद भी इंसाफ का इंतजार, पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या में अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं

Edited By Updated: 24 Oct, 2026 11:49 AM

arshad sharif investigation

वरिष्ठ पाकिस्तानी खोजी पत्रकार और टीवी एंकर अरशद शरीफ की केन्या पुलिस द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के चार साल बाद भी, किसी भी दोषी को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही उस पर मुकदमा चलाया गया है।

Arshad Sharif Murder Investigation : वरिष्ठ पाकिस्तानी खोजी पत्रकार और टीवी एंकर अरशद शरीफ की केन्या पुलिस द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के चार साल बाद भी, किसी भी दोषी को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही उस पर मुकदमा चलाया गया है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (IFJ) और उससे जुड़ी संस्था, पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (PFUJ) ने इस स्थिति को खत्म करने की मांग की है, जिसमें दोषियों को सजा न मिलने के कारण शरीफ के परिवार और सहयोगियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की है कि उनकी हत्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाए।

वरिष्ठ खोजी पत्रकार और टीवी एंकर शरीफ, अपने काम से जुड़ी धमकियों के कारण अगस्त 2022 में पाकिस्तान छोड़कर केन्या चले गए थे, जहाँ वे स्वेच्छा से निर्वासन में रह रहे थे। 23 अक्टूबर 2022 को, नैरोबी के दक्षिण में टिंगा मार्केट के पास, केन्या की 'जनरल सर्विस यूनिट' के अधिकारियों ने उस गाड़ी पर गोलियां चला दीं, जिसमें शरीफ सवार थे। पुलिस ने गोली चलाने की बात तो मानी, लेकिन शुरुआत में दावा किया कि उन्हें लगा था कि यह गाड़ी किसी कारजैकिंग (गाड़ी लूटने की घटना) से जुड़ी है।

पाकिस्तान से केन्या भेजी गई दो सदस्यीय जांच टीम ने दिसंबर 2022 में निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या एक सुनियोजित लक्षित हत्या (planned targeted assassination) लगती है। टीम की रिपोर्ट में गवाहों और पुलिस के बयानों में विरोधाभास पाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि केन्याई अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों और सबूतों तक पूरी पहुंच नहीं दी। इसके बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके तहत एक विशेष संयुक्त जांच टीम (Special Joint Investigation Team) का गठन किया गया।

पाकिस्तान में संवैधानिक सुधारों के बाद, इस मामले की कार्यवाही देश के 'फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट' (संघीय संवैधानिक न्यायालय) में स्थानांतरित कर दी गई, जिसने 2026 की शुरुआत में जांच की अपनी निगरानी समाप्त कर दी। आपराधिक जांच कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास ही रही, लेकिन न तो कोई गिरफ्तारी हुई, न ही कोई मुकदमा चला और न ही जवाबदेही तय करने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय की गई।

केन्या में, शरीफ की पत्नियों में से एक, जावेरिया सिद्दीकी ने 'केन्या यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स' और 'केन्या कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन' के साथ मिलकर कानूनी कार्रवाई की। केन्याई अदालतों ने पाया कि गोलीबारी शरीफ के जीवन के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन थी। अदालत ने उनके परिवार को मुआवजे के तौर पर 10 मिलियन केन्याई शिलिंग (लगभग 77,000 अमेरिकी डॉलर) देने का आदेश दिया, लेकिन इस हत्या को 'यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार' की श्रेणी में मानने से इनकार कर दिया। हालाँकि, 3 जुलाई 2026 को केन्या के सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतिम अपील को खारिज कर दिया। इस अपील में अधिकारियों पर मुकदमा चलाने, जांच के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा चलाने का फैसला 'डायरेक्टर ऑफ पब्लिक प्रॉसिक्यूशन' (सरकारी अभियोजन निदेशक) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

PFUJ ने कहा- "पाकिस्तान और केन्या के अधिकारियों द्वारा अरशद शरीफ की मौत को हत्या माने जाने के बावजूद, उनकी हत्या के मामले में दोषियों को कोई सजा नहीं मिली है। PFUJ, पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से फिर अपील करता है कि वे अरशद शरीफ के परिवार को न्याय दिलाएं, दोषियों पर मुकदमा चलाकर उन्हें सजा दें और इस मामले में उन्हें बिना सजा के बच निकलने से रोकें।"

IFJ ने कहा- अरशद शरीफ की हत्या के चार साल बाद भी दोषियों को जवाबदेह न ठहराना, न्याय से वंचित रखने का एक गंभीर मामला है और दुनिया भर के पत्रकारों के लिए एक खतरनाक संदेश है। IFJ, शरीफ के परिवार और पाकिस्तान के पत्रकार समुदाय के साथ खड़ा है। हम मांग करते हैं कि केन्या और पाकिस्तान में एक स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, जांच के सभी निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं और उनकी मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाए। दोषियों को बिना सजा के बच निकलने की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

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