Edited By Tanuja,Updated: 12 Jan, 2026 04:45 PM

बोंडी आतंकी हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया में सख्त कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। सरकार हेट स्पीच, चरमपंथ और अवैध हथियारों पर कड़े कानून लाने जा रही है, ताकि नफरत और हिंसा पर एक साथ लगाम लगाई जा सके।
International Desk: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने दिसंबर में हुए बोंडी आतंकी हमले के बाद बड़ा फैसला लेते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है। सरकार हेट स्पीच, चरमपंथ और हथियारों पर सख्त कानून लाने जा रही है। संसद के दोनों सदन 19 और 20 जनवरी को बैठेंगे, जबकि पहले संसद का सत्र 2 फरवरी को शुरू होना था। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बोंडी बीच के आतंकियों के दिमाग में नफरत थी और उनके हाथों में बंदूकें थीं। यह कानून दोनों से निपटेगा, और हमें दोनों से निपटना ही होगा।”
सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला “कॉम्बैटिंग एंटीसेमिटिज़्म, हेट एंड एक्सट्रीमिज़्म बिल” व्यापक सुधारों का पैकेज है। इसमें नफरत से जुड़े अपराधों पर सख्त सज़ा, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने वाले हेट प्रीचर्स के खिलाफ नए गंभीर अपराध, और डराने-धमकाने व उकसावे पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही प्रतिबंधित प्रतीकों पर रोक को और मजबूत किया जाएगा। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो गृह मंत्री को नफरत फैलाने वालों का वीज़ा रद्द करने या अस्वीकार करने का अधिक अधिकार मिलेगा। इसके अलावा सरकार संगठनों को “प्रतिबंधित हेट ग्रुप” घोषित कर सकेगी। सरकार इस विधेयक पर बहस से पहले बोंडी आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए संसद में शोक प्रस्ताव भी लाएगी।
नए कानून के तहत नेशनल गन्स बायबैक स्कीम भी शुरू की जाएगी, जिसका मकसद ऑस्ट्रेलियाई सड़कों से अवैध हथियारों को हटाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया ऐसा देश बना रहे जहां हर व्यक्ति को अपनी पहचान पर गर्व करने का अधिकार हो। लेकिन नफरत, हिंसा और समाज को बांटने वाला व्यवहार गैरकानूनी होगा।”गौरतलब है कि 8 जनवरी को ही प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने बोंडी हमले के बाद देश में यहूदी विरोध और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए रॉयल कमीशन गठित करने की घोषणा की थी। यह ऑस्ट्रेलिया में जांच का सर्वोच्च स्तर है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व हाईकोर्ट जज वर्जीनिया बेल करेंगी। आयोग की रिपोर्ट दिसंबर के मध्य तक आने की उम्मीद है।