Edited By Tanuja,Updated: 19 Jan, 2026 01:32 PM

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से यूरोप में जबरदस्त नाराज़गी है। नीदरलैंड ने इसे ‘ब्लैकमेल’ कहा, जबकि यूरोपीय संघ ने एकजुट होकर चेताया कि दबाव के आगे झुकेंगे नहीं और जवाबी कार्रवाई से...
International Desk: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी ने अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तीखा तनाव पैदा कर दिया है। नीदरलैंड ने इस कदम को खुला ‘ब्लैकमेल’ करार दिया है, जबकि यूरोपीय संघ और कई सदस्य देशों ने एकजुट होकर अमेरिका को चेतावनी दी है कि दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। डच विदेश मंत्री डेविड वान वील ने डच पब्लिक ब्रॉडकास्टर के एक कार्यक्रम में कहा कि राजनीतिक या सैन्य दबाव बनाने के लिए व्यापार शुल्क का इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने अमेरिका से 1 फरवरी से लागू होने वाले प्रस्तावित टैरिफ को वापस लेने की मांग की और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर विकल्प खुला रहेगा।
दरअसल, ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका 1 फरवरी से डेनमार्क, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, जो जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह शुल्क तब तक लागू रहेगा, जब तक अमेरिका और ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र है, जबकि रक्षा और विदेश नीति कोपेनहेगन के पास है। अमेरिका पहले से ही वहां एक सैन्य अड्डा संचालित करता है, और ट्रंप 2025 में सत्ता में वापसी के बाद से लगातार ग्रीनलैंड को ‘हासिल’ करने की बात कह रहे हैं। यूरोप की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रूप से एकजुट रही। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, ब्रिटेन समेत आठ देशों ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ पूर्ण एकजुटता जताई।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यूरोपीय संघ किसी भी तरह के दबाव के खिलाफ खुद की रक्षा के लिए तैयार है। जर्मनी के उप-चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने कहा कि अब एक “रेड लाइन” पार हो चुकी है। वहीं, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने साफ कहा “यूरोप को ब्लैकमेल नहीं किया जा सकता।”इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी अमेरिकी टैरिफ को “गलती” बताया और कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े फैसलों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।यूरोपीय संसद में तो यहां तक चर्चा है कि अमेरिका के खिलाफ ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ जैसे सख्त आर्थिक कदम उठाए जाएं, जिसके तहत भारी जवाबी टैरिफ और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीनलैंड को लेकर यह टकराव ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को गंभीर आर्थिक और कूटनीतिक टकराव की ओर धकेल सकता है।