जहां से होती है दुनिया को तेल सप्लाई, ईरान ने वही समुद्री रास्ता किया बंद, दागीं मिसाइलें, क्या फिर जंग की आग में जलेगा मिडिल ईस्ट?

Edited By Updated: 17 Feb, 2026 09:05 PM

iran closed the same sea route from where oil is supplied to the world

ईरान ने मंगलवार को एक बड़ा और सख्त संदेश दिया। एक तरफ वह अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते Strait of Hormuz में लाइव फायरिंग करते हुए उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

इंटरनेशनल डेस्कः ईरान ने मंगलवार को एक बड़ा और सख्त संदेश दिया। एक तरफ वह अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते Strait of Hormuz में लाइव फायरिंग करते हुए उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

ईरान ने साफ संकेत दिया कि अगर उस पर दबाव डाला गया या हमला हुआ, तो वह इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही रोक सकता है।

क्या है स्ट्रेट ऑफ होरमुज और क्यों है इतना अहम?

स्ट्रेट ऑफ होरमुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (चोक पॉइंट) माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान स्थित है। इसकी सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 21 मील (करीब 33–34 किलोमीटर) है।

सबसे अहम बात यह है कि दुनिया में होने वाली कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक हर दिन औसतन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचते हैं। इसलिए अगर यह रास्ता बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

बातचीत भी और ताकत का प्रदर्शन भी

मंगलवार को ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा में परमाणु मुद्दे पर बातचीत हो रही थी। उसी समय ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज में बड़े पैमाने पर लाइव फायरिंग वाली सैन्य एक्सरसाइज शुरू कर दी। जैसे ही बातचीत शुरू हुई, ईरानी मीडिया ने घोषणा की कि ईरान ने होरमुज की दिशा में लाइव मिसाइलें दागी हैं। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम के मुताबिक, देश के अंदर और तटीय इलाकों से दागी गई मिसाइलों ने अपने तय टारगेट को सफलतापूर्वक नष्ट किया। इस लाइव फायरिंग की वजह से मंगलवार को कुछ समय के लिए स्ट्रेट ऑफ होरमुज बंद रहा। विशेषज्ञ इसे ईरान की “दो ट्रैक रणनीति” बता रहे हैं — यानी एक तरफ कूटनीतिक बातचीत और दूसरी तरफ ताकत का खुला प्रदर्शन।

अमेरिका से सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दे पर बात

ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के साथ सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करेगा, घरेलू नीतियों या आंतरिक मामलों पर नहीं। इसमें हाल ही में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई भी शामिल है, जिस पर पश्चिमी देशों ने सवाल उठाए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाने के लिए कई बार सख्त चेतावनी दी है और जरूरत पड़ने पर ताकत के इस्तेमाल की बात भी कही है। इसके जवाब में ईरान ने कहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह सीधा जवाब देगा।

जिनेवा में बातचीत का दौर खत्म

ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, जिनेवा में हुआ बातचीत का नया दौर करीब तीन घंटे बाद खत्म हो गया।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा:

  • हमने प्रतिबंध हटाने और परमाणु मुद्दों से जुड़ी कुछ तकनीकी जानकारियां साझा की हैं।

  • मुद्दे जटिल हैं और दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी है।

  • जब तक जरूरत होगी, बातचीत जारी रखने को तैयार हैं।

अब्बास अराघची कर रहे हैं ईरान की अगुआई

ईरान की तरफ से बातचीत का नेतृत्व विदेश मंत्री Abbas Araghchi कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख से मुलाकात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा कि वे एक “न्यायसंगत और बराबरी वाली डील” के लिए जिनेवा पहुंचे हैं, लेकिन धमकियों के आगे झुकना किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी

इस बीच अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान समझौता करना चाहता है और शायद वह भी बातचीत में शामिल हों, कम से कम अप्रत्यक्ष रूप से। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान बिना डील के परिणामों का सामना करना चाहेगा।

वैश्विक असर की आशंका

स्ट्रेट ऑफ होरमुज का अस्थायी बंद होना भले ही कुछ समय के लिए था, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि ईरान के पास इस अहम समुद्री मार्ग को प्रभावित करने की क्षमता है।

अगर भविष्य में यह रास्ता लंबे समय के लिए बंद होता है, तो:

  • अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

  • एशिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

  • वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

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