Edited By Pardeep,Updated: 14 Feb, 2026 10:53 PM

चीन की जन्मदर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। देश में काम करने वाली आबादी लगातार कम हो रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अभी चीन में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग कुल आबादी का करीब 23% हैं। अनुमान है कि सदी के अंत तक यह...
इंटरनेशनल डेस्कः चीन की जन्मदर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। देश में काम करने वाली आबादी लगातार कम हो रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अभी चीन में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग कुल आबादी का करीब 23% हैं। अनुमान है कि सदी के अंत तक यह संख्या आधे से ज्यादा हो सकती है। इसका मतलब है कि काम करने वाले लोग कम होंगे और पेंशन लेने वालों की संख्या ज्यादा।
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। बच्चों के जन्म पर नकद प्रोत्साहन, टैक्स में छूट, शादी के नियम आसान करना जैसे फैसले लिए गए, लेकिन इनका असर बहुत ज्यादा नहीं दिखा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन आने वाले समय में आर्थिक संकट का सामना करेगा या नहीं। अब बीजिंग की नजर एक नए समाधान पर है—रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
रोबोट बनेंगे नई ताकत?
CNN की एक खबर के मुताबिक चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक रोबोट बाजार बन चुका है। साल 2024 में दुनिया भर में लगाए गए आधे से ज्यादा रोबोट चीन में ही लगाए गए। कई फैक्ट्रियों में अब “डार्क फैक्ट्री” मॉडल अपनाया जा रहा है। इसका मतलब है ऐसी फैक्ट्रियां जहां मशीनें अपने आप काम करती हैं और इंसानों की जरूरत बहुत कम होती है।
चीन सरकार ने साल 2015 में Made in China 2025 योजना शुरू की थी। इसका मकसद देश को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत बनाना था। अब यही योजना जनसंख्या में गिरावट की समस्या से निपटने का एक बड़ा जरिया बन रही है।
क्या आर्थिक ताकत बनी रहेगी?
रिपोर्ट के अनुसार चीन ने 2024 में पहली बार रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही पेंशन सुधार और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि बुजुर्ग आबादी भी ज्यादा समय तक काम कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टेक्नोलॉजी की रफ्तार जनसंख्या में गिरावट से ज्यादा तेज रही, तो चीन अपनी आर्थिक ताकत को बनाए रख सकता है। यानी कम लोगों के बावजूद ज्यादा उत्पादन संभव हो सकता है।
बुजुर्गों की देखभाल भी करेंगे रोबोट
सरकार की योजना सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। चीन अब बुजुर्गों की देखभाल में भी मशीनों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है। AI आधारित केयर सिस्टम, ह्यूमनॉइड रोबोट, एक्सोस्केलेटन और मसल सूट जैसी तकनीकों पर तेजी से काम चल रहा है। इन तकनीकों का मकसद है कि बुजुर्गों को चलने-फिरने, दवा लेने और रोजमर्रा के कामों में सहारा मिल सके। इससे परिवारों और हेल्थकेयर सिस्टम पर दबाव कम हो सकता है।
लेकिन खतरे भी कम नहीं
हालांकि ऑटोमेशन लंबे समय में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन छोटे समय में नौकरियों पर असर पड़ सकता है। कुछ अनुमानों के मुताबिक चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के करीब 70% काम पर AI और रोबोट का असर पड़ सकता है। यानी एक तरफ श्रमिकों की कमी है, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी भी बढ़ सकती है। ऐसे में चीन के सामने चुनौती यह है कि वह टेक्नोलॉजी और रोजगार के बीच संतुलन कैसे बनाए।