Edited By Pardeep,Updated: 01 Apr, 2026 10:19 PM

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव अब एक विनाशकारी आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सैन्य शक्ति के बजाय आर्थिक मोर्चे पर ऐसी चाल चली है जिसने वाशिंगटन और वैश्विक बाजारों को हिला कर रख दिया है।
इंटरनेशनल डेस्कः ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ता तनाव अब एक विनाशकारी आर्थिक युद्ध का रूप ले चुका है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सैन्य शक्ति के बजाय आर्थिक मोर्चे पर ऐसी चाल चली है जिसने वाशिंगटन और वैश्विक बाजारों को हिला कर रख दिया है।
परमाणु कार्यक्रम पर हमलों का सीमित असर
अमेरिकी रक्षा विभाग का अनुमान था कि 2025 और 2026 के हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी पीछे धकेल दिया है, लेकिन खुफिया जानकारी इसके विपरीत संकेत दे रही है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के अनुसार, ईरान ने हमलों से पहले ही अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था, जिससे उसकी परमाणु क्षमता को केवल कुछ महीनों का ही नुकसान हुआ है। इसके अलावा, ईरान के भीतर अब परमाणु बम बनाने के पक्ष में जनमत और विशिष्ट राय मजबूत हुई है और पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई द्वारा परमाणु हथियारों के खिलाफ जारी किया गया 'फतवा' अब प्रभावी नहीं रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य: एक आर्थिक हथियार
ईरान ने भौगोलिक लाभ उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को एक हथियार में बदल दिया है। दुनिया के 25% समुद्री तेल व्यापार और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का मार्ग होने के कारण, ईरान ने इस चोकपॉइंट पर नियंत्रण कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप होर्मुज से टैंकर यातायात लगभग शून्य हो गया है। कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं और इसके $140 तक पहुंचने का अनुमान है जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही एशियाई देशों, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
ट्रंप प्रशासन की विरोधाभासी नीति
एक विचित्र रणनीतिक मोड़ में, ट्रंप प्रशासन एक तरफ ईरान पर बमबारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी ने 140 मिलियन बैरल ईरानी कच्चे तेल पर से प्रतिबंध हटा दिए हैं। इसे विश्लेषक एक हाथ से बमबारी और दूसरे हाथ से चेक लिखना कह रहे हैं।
चीन की बढ़ती पैठ और पेट्रोडॉलर को चुनौती
ईरान अब उन टैंकरों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे रहा है जो तेल का व्यापार चीनी युआन में कर रहे हैं। यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी 'पेट्रोडॉलर' के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है और क्षेत्र के वित्तीय ढांचे की चाबी चीन के हाथों में सौंप रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन और जिद्दी रुख
ईरान में पूर्व नेता की मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने सत्ता संभाली है और ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के रुख में कोई नरमी नहीं आई है। ईरान का तर्क स्पष्ट है: जब तक होर्मुज पर उसका नियंत्रण है, वह सैन्य दबाव के बावजूद बातचीत की मेज पर जल्दबाजी नहीं दिखाएगा और दुश्मन को आर्थिक रूप से थकाने की रणनीति जारी रखेगा।