युद्ध और खतरनाक मोड़ परः होर्मुज पर ईरान के सख्त बयान पर भड़के ट्रंप, क्षेत्र में सैन्य बलों की तैनाती कर दी तेज

Edited By Updated: 26 Mar, 2026 05:06 PM

us tightens stance after iran s decision to maintain control of the hormuz

ईरान द्वारा Strait of Hormuz पर नियंत्रण मजबूत करने के बाद अमेरिका का रुख और सख्त हो गया है। सैन्य तैनाती बढ़ रही है, हमले तेज हैं और तेल कीमतें उछल रही हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और युद्ध का खतरा गहरा गया है।

Washington: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran द्वारा Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के फैसले के बाद United States ने भी अपना रुख और कड़ा कर लिया है। कूटनीतिक प्रयास फिलहाल विफल होते नजर आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। वहीं, अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य बलों की तैनाती तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना का जहाज USS Tripoli लगभग 2,500 सैनिकों के साथ पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 सैनिक भी तैनात किए जा रहे हैं।

 

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इजराइल में ईरानी मिसाइल हमलों की चेतावनी के लिए सायरन बजाए गए, जबकि Abu Dhabi में मिसाइल के मलबे से दो लोगों की मौत और तीन घायल होने की खबर है। इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान होर्मुज में “टोल नाका सिस्टम” लागू कर रहा है, जहां कुछ जहाजों से सुरक्षित गुजरने के लिए शुल्क लिया जा रहा है। ईरानी संसद भी इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने पर काम कर रही है, जिसमें जहाजों से भुगतान लेने की व्यवस्था शामिल है।

 

अमेरिका की रणनीति अब और आक्रामक होती दिख रही है। माना जा रहा है कि उसका ध्यान Kharg Island जैसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनलों या जलडमरूमध्य के आसपास के रणनीतिक ठिकानों पर नियंत्रण हासिल करने पर हो सकता है।  Brad Cooper ने दावा किया है कि अमेरिका अब तक ईरान के खिलाफ 10,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है और उसकी नौसेना के 92% बड़े पोत तबाह हो चुके हैं। इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर भी साफ दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 40% से ज्यादा की वृद्धि है।

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