Edited By Tanuja,Updated: 20 May, 2026 12:52 PM

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की बीजिंग बैठक ने दुनिया को बड़ा भू-राजनीतिक संदेश दिया है। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता दिखाई। ईरान युद्ध, यूक्रेन संकट और अमेरिका के...
International Desk: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने उनका भव्य स्वागत किया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, ईरान संकट और अमेरिका-चीन तनाव जैसे बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों से जूझ रही है। बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता की। रेड कार्पेट स्वागत और सैन्य बैंड के साथ हुए इस समारोह को चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियों का बड़ा संकेत माना जा रहा है। बैठक के दौरान पुतिन ने कहा कि बाहरी दबावों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस और चीन के आर्थिक तथा रणनीतिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
वहीं जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक तालमेल पहले से ज्यादा गहरा हुआ है।ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव पर भी चर्चा हुई। जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्र में युद्ध बढ़ाना सही नहीं होगा और व्यापक युद्धविराम बेहद जरूरी है। उन्होंने बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। क्रेमलिन के मुताबिक इस दौरे के दौरान रूस और चीन करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। इनमें ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई अहम करार शामिल हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूस की गैस बिक्री काफी घट चुकी है। ऐसे में चीन अब रूस के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है। इसी वजह से ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन परियोजना पर भी खास चर्चा हो रही है। इस पाइपलाइन के जरिए रूस हर साल बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस चीन भेज सकेगा।
पुतिन ने चीन रवाना होने से पहले जारी वीडियो संदेश में कहा कि रूस और चीन के रिश्ते “अभूतपूर्व स्तर” पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा अमेरिका को बड़ा कूटनीतिक संदेश है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की बीजिंग यात्रा के बाद अब पुतिन का चीन पहुंचना दिखाता है कि बीजिंग एक साथ वॉशिंगटन और मॉस्को दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए अपनी वैश्विक ताकत बढ़ाना चाहता है। पुतिन और जिनपिंग अब तक 40 से ज्यादा बार मिल चुके हैं।
दोनों नेता BRICS और Shanghai Cooperation Organisation जैसे मंचों पर अक्सर साथ दिखाई देते हैं और खुद को “मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर” का समर्थक बताते हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद चीन और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार 228 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। चीन रूस से तेल और गैस खरीद रहा है, जबकि रूस को चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और वाहन मिल रहे हैं। वैश्विक विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग में हुई यह मुलाकात आने वाले समय में विश्व राजनीति, ऊर्जा बाजार और अमेरिका-यूरोप की रणनीतियों पर बड़ा असर डाल सकती है।