80 साल का लंबा इंतजार: बंटवारे के बाद पहली बार लाहौर कॉलेज के गुरुद्वारे में दिखी रौनक, हुआ अरदास का आयोजन

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 01:43 AM

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पाकिस्तान के एचिसन कॉलेज परिसर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे में लगभग 80 वर्षों बाद सिख अरदास आयोजित की गई। कॉलेज के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। वर्ष 1947 के बाद से सिख विद्यार्थियों की कमी के कारण एचिसन कॉलेज बंद था, हालांकि उसका रखरखाव...

इंटरनेशनल डेस्कः पाकिस्तान के एचिसन कॉलेज परिसर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे में लगभग 80 वर्षों बाद सिख अरदास आयोजित की गई। कॉलेज के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। वर्ष 1947 के बाद से सिख विद्यार्थियों की कमी के कारण एचिसन कॉलेज बंद था, हालांकि उसका रखरखाव कॉलेज द्वारा किया जाता रहा।

कॉलेज के मानद दूत डॉ. तरूणजीत सिंह बुटालिया ने बताया, "बुधवार को लाहौर के मॉल रोड स्थित ऐचिसन कॉलेज परिसर के गुरुद्वारे में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सिख अरदास सभा आयोजित की गई।" उन्होंने कहा कि यह विशेष आयोजन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें करीब 100 लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए भावुक क्षण था। मेरे पिता, दादा और परदादा विभाजन से पहले जब ऐचिसन कॉलेज में छात्र थे, तब वे प्रतिदिन शाम को यहीं अरदास देते थे।"

उन्होंने बताया कि 140वीं वर्षगांठ समारोह के लिए इस कार्यक्रम के आयोजन में उन्होंने सहयोग किया। कॉलेज के प्राचार्य हुसैन ने कहा, "वर्ष 1947 के बाद ऐचिसन कॉलेज के गुरुद्वारे में आयोजित यह अरदास सेवा हमारी 140वीं वर्षगांठ की आध्यात्मिक शुरुआत है। हम भविष्य में ऐसे और अवसरों की उम्मीद करते हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा दें।" एचिसन कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई थी। 

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