ईरान के खिलाफ ब्लॉकेड पर अमेरिका को बड़ा झटका! ब्रिटेन ने साथ देने से किया इनकार

Edited By Updated: 13 Apr, 2026 01:49 PM

major blow to us over blockade against iran britain refuses to support

इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर लगाम कसने के लिए बड़े एक्शन की तैयारी कर ली है। इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर ने साफ कर दिया है कि उनका देश ईरानी पोर्ट्स को ब्लॉक करने के अमेरिकी फैसले का सपोर्ट नहीं...

इंटरनेशनल डेस्क: इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर लगाम कसने के लिए बड़े एक्शन की तैयारी कर ली है। इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारर ने साफ कर दिया है कि उनका देश ईरानी पोर्ट्स को ब्लॉक करने के अमेरिकी फैसले का सपोर्ट नहीं करेगा। ब्रिटेन ने यह अहम स्टैंड तब लिया है जब अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज की खाड़ी' से तेल सप्लाई रोकने और ईरान पर कड़े समुद्री बैन लगाने का ऐलान किया है।

ब्रिटिश सरकार ने कहा-

ब्रिटिश सरकार ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के 'नेवल ब्लॉकेड' का हिस्सा नहीं होंगे। PM स्टारर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता युद्ध को बढ़ाना नहीं बल्कि खत्म करना है।

ब्लॉकेड से तेल की कीमतें छू सकती हैं आसमान

बता दें कि इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फेल होने के बाद अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी नेवी ईरानी पोर्ट्स पर आने-जाने वाले हर जहाज़ को रोकेगी। ट्रंप का कहना है कि यह ब्लॉकेड तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान न्यूक्लियर मुद्दों पर कोई डील नहीं कर लेता। हालांकि ब्रिटेन इस ब्लॉकेड में शामिल नहीं होगा, लेकिन उसने कहा है कि वह अपने जहाजों की सुरक्षा और 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' (समुद्री रास्तों की आज़ादी) के लिए इस इलाके में अपनी मौजूदा नेवल एक्टिविटीज़ जारी रखेगा। ब्रिटेन का मानना ​​है कि ईरान के साथ सीधी जंग या ब्लॉकेड से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका ब्रिटिश इकॉनमी पर बुरा असर पड़ेगा।

अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में खटास आने की संभावना

इस फैसले से अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में खटास आने की संभावना है। ट्रंप पहले ही स्टारमर की आलोचना कर चुके हैं, जंग के बीच उनके रवैये को कमज़ोर बता रहे हैं। लेकिन स्टारमर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन ऐसे किसी जंग में नहीं घसीटा जाना चाहता जो उसके देश के हित में न हो। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है।

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