Edited By Rohini Oberoi,Updated: 25 Mar, 2026 12:10 PM

वैश्विक स्तर पर तेल संकट की आहट को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए कमर कस ली है। सरकार ने पूरे देश में '5-डे व्हीकल रिस्ट्रिक्शन सिस्टम' (5-Day Vehicle Restriction System) लागू करने का एलान किया है। यह नियम काफी हद तक दिल्ली...
South Korea 5-Day Vehicle Restriction System : वैश्विक स्तर पर तेल संकट की आहट को देखते हुए दक्षिण कोरिया की सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए कमर कस ली है। सरकार ने पूरे देश में '5-डे व्हीकल रिस्ट्रिक्शन सिस्टम' (5-Day Vehicle Restriction System) लागू करने का एलान किया है। यह नियम काफी हद तक दिल्ली के 'ऑड-ईवन' फॉर्मूले जैसा है लेकिन इसे और भी व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है।
क्या है '5-डे' फॉर्मूला?
इस नए सिस्टम के तहत गाड़ियों को उनकी नंबर प्लेट के आखिरी अंक (Last Digit) के आधार पर 5 अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा गया है। हफ्ते के पांच कार्यदिवसों (सोमवार से शुक्रवार) में से हर ग्रुप की गाड़ी के लिए एक दिन 'बैन निर्धारित किया गया है।यानी आपकी कार नंबर के आधार पर हफ्ते में एक दिन सड़क पर नहीं उतर पाएगी। उदाहरण के तौर पर अगर आपकी गाड़ी का नंबर किसी खास ग्रुप में आता है तो आप उस दिन कार का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकेंगे।
सरकारी दफ्तरों में आज से सख्ती
बुधवार से दक्षिण कोरिया के सभी सरकारी कार्यालयों और पब्लिक सेक्टर यूनिट्स में इस नियम को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आम नागरिकों और निजी कंपनियों के लिए फिलहाल यह नियम अनिवार्य नहीं है लेकिन सरकार ने उन्हें स्वेच्छा से इसे अपनाने की अपील की है।
यह भी पढ़ें: Social Media लवर्स को बड़ा झटका! अब बिना ID प्रूफ नहीं चलेगा Facebook-Instagram, डेटिंग और...
इन गाड़ियों को मिली सफेद झंडी
पर्यावरण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कुछ छूट भी दी है:
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): चूंकि ये तेल पर निर्भर नहीं हैं इसलिए इन्हें इस पाबंदी से बाहर रखा गया है।
हाइड्रोजन गाड़ियां: इन आधुनिक गाड़ियों को भी हफ्ते के सातों दिन चलने की आजादी होगी।
यह भी पढ़ें: Brain Stroke आने से पहले शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत! मामूली सिरदर्द और कमजोरी को न करें नजरअंदाज
सिर्फ कार नहीं, शिफ्ट भी बदलेगी
सरकार का उद्देश्य केवल गाड़ियां रोकना नहीं बल्कि ऊर्जा की कुल खपत कम करना है। इसके लिए कंपनियों को सुझाव दिया गया है कि वे कर्मचारियों के वर्किंग ऑवर्स (Working Hours) में बदलाव करें और अलग-अलग शिफ्ट में काम कराएं। इससे न केवल सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा बल्कि ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।