Edited By Rohini Oberoi,Updated: 25 Mar, 2026 10:03 AM

भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और डेटिंग-गेमिंग ऐप्स इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी खबर है। अब सोशल मीडिया पर पहचान छिपाकर दूसरों को परेशान करना या फर्जी अकाउंट बनाना मुमकिन नहीं होगा। एक संसदीय समिति ने सरकार को बेहद सख्त सिफारिशें भेजी...
Social Media in India : भारत में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और डेटिंग-गेमिंग ऐप्स इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी खबर है। अब सोशल मीडिया पर पहचान छिपाकर दूसरों को परेशान करना या फर्जी अकाउंट बनाना मुमकिन नहीं होगा। एक संसदीय समिति ने सरकार को बेहद सख्त सिफारिशें भेजी हैं जो इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह बदल सकती हैं। भारत में ऑनलाइन सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक संसदीय समिति ने क्रांतिकारी बदलावों का सुझाव दिया है। महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संसदीय समिति (2025-26) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सिफारिश की है कि देश के सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर KYC (Know Your Customer) यानी पहचान सत्यापन को अनिवार्य कर दिया जाए।
क्यों पड़ी इस सख्त नियम की जरूरत?
समिति का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए 'असली पहचान' का होना जरूरी है। वर्तमान में जो समस्याएं सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, वे हैं:
-
फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी: फेक आईडी बनाकर लोगों को ठगना और बदनाम करना।
-
ऑनलाइन उत्पीड़न: महिलाओं और बच्चों को गुमनाम रहकर निशाना बनाना।
-
डीपफेक और भ्रामक जानकारी: एआई (AI) के जरिए गलत कंटेंट फैलाना।
-
धीमी जांच: पहचान न होने के कारण अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को महीनों लग जाते हैं।

सिर्फ एक बार नहीं, बार-बार होगा वेरिफिकेशन
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि केवाईसी की प्रक्रिया सिर्फ अकाउंट खोलते समय ही नहीं बल्कि समय-समय पर दोहराई जानी चाहिए।
-
ब्लैकलिस्टिंग: जिन अकाउंट्स के खिलाफ बार-बार शिकायतें आएंगी उन्हें चिन्हित किया जाएगा ताकि वे दूसरे नाम से नया अकाउंट न बना सकें।
-
उम्र की जांच: बच्चों को एडल्ट कंटेंट और गेमिंग की लत से बचाने के लिए 'एज वेरिफिकेशन' (Age Verification) के कड़े नियम लागू होंगे।

क्या हैं चुनौतियां और चिंताएं?
संसदीय समिति के इन सुझावों पर बहस भी शुरू हो गई है। विशेषज्ञों ने दो मुख्य चिंताएं जताई हैं:
यह भी पढ़ें: मौत के आंसू! आंखों से खून निकलने के बाद लड़की ने तोड़ा दम, जानें यह दुर्लभ बीमारी क्यों है इतनी जानलेवा?
-
प्राइवेसी (Privacy): करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा टेक कंपनियों के पास जमा होने से डेटा लीक का खतरा बढ़ सकता है।
-
पहुंच (Accessibility): भारत में कई ऐसे यूजर्स हैं जिनके पास डिजिटल दस्तावेज नहीं हैं वे इन प्लेटफॉर्म्स से बाहर हो सकते हैं।

आगे की राह: क्या होगा असर?
फिलहाल ये सुझाव हैं और सरकार इन्हें लागू करने पर विचार कर रही है। यदि ये नियम कानून बनते हैं तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां सोशल मीडिया पर जवाबदेही (Accountability) सबसे ज्यादा होगी। यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हो सकता है, बशर्ते प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाया जाए।