Edited By Tanuja,Updated: 06 Jun, 2026 07:08 PM

फैरो द्वीप में एक ही दिन में लगभग 700 पायलट व्हेल और डॉल्फ़िन मारे जाने से दुनिया भर में विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना वहां की संसद द्वारा व्हेल और डॉल्फ़िन शिकार को पशु कल्याण कानून से बाहर करने के एक दिन बाद हुई। पशु अधिकार संगठन इसे क्रूरता बता...
International Desk: उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित फैरो द्वीप (Faroe Islands में 27 मई को एक ही दिन में लगभग 700 पायलट व्हेल और डॉल्फ़िन मार दी गईं। यह हाल के वर्षों में वहां हुई सबसे बड़ी सामूहिक शिकार घटनाओं में से एक मानी जा रही है। इस घटना के बाद समुद्र का पानी खून से लाल दिखाई देने लगा, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। घटना से ठीक एक दिन पहले फैरो द्वीप की संसद ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया था। संसद ने सर्वसम्मति से मतदान कर व्हेल और डॉल्फ़िन के शिकार को देश के पशु कल्याण कानून (Animal Welfare Act) के दायरे से बाहर कर दिया। यानी अब इस प्रकार के शिकार पर पशु कल्याण कानून की कई शर्तें लागू नहीं होंगी। इस फैसले के 24 घंटे के भीतर ही बड़े पैमाने पर शिकार हुआ, जिससे विवाद और बढ़ गया।
रिपोर्टों के अनुसार राजधानी Tórshavn के पास लगभग 402 पायलट व्हेल मारी गईं। इसके अलावा दो अन्य स्थानों पर लगभग 282 अटलांटिक व्हाइट-साइडेड डॉल्फ़िन का शिकार किया गया। कुल मिलाकर लगभग 700 समुद्री स्तनधारियों की जान चली गई। यह संख्या पूरे 2024 में मारे गए समुद्री जीवों की कुल संख्या के लगभग बराबर बताई जा रही है। पशु संरक्षण संगठन OceanCare ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। संगठन का कहना है कि कई जानवरों को मरने से पहले लंबे समय तक दर्द और तनाव झेलना पड़ा। कुछ जानवर निर्धारित शिकार क्षेत्र के बाहर फंस गए थे, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ गई। संगठन ने सरकार से कानून में किए गए बदलाव को वापस लेने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
फैरो द्वीप में व्हेल और डॉल्फ़िन के शिकार की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे स्थानीय भाषा में "ग्रिंडाड्राप" कहा जाता है। इसमें नावों की मदद से समुद्री जीवों के झुंड को तट की ओर हांका जाता है और फिर उथले पानी में उनका शिकार किया जाता है। स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपरा का हिस्सा मानते हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि आज के समय में फैरो द्वीप आर्थिक रूप से समृद्ध है और लोगों की खाद्य जरूरतें इन जानवरों के शिकार पर निर्भर नहीं हैं। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में बुद्धिमान और सामाजिक समुद्री जीवों को मारना अनावश्यक और क्रूर है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पायलट व्हेल वास्तव में डॉल्फ़िन परिवार की सदस्य होती हैं। ये बहुत बुद्धिमान, सामाजिक और परिवारों में रहने वाले जीव हैं। यही कारण है कि इनके शिकार को लेकर हर बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छिड़ जाती है।