नेपाल में चुनाव से पहले सड़कों पर उतरे लोग, "हमें हमारा राजा चाहिए, राजशाही वापस लाओ” के लगाए नारे

Edited By Updated: 11 Jan, 2026 07:21 PM

nepalese royalists demand monarchy restoration ahead of march elections

नेपाल की राजधानी काठमांडू में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के समर्थकों ने राजशाही बहाली की मांग को लेकर रैली निकाली। मार्च में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले यह शक्ति प्रदर्शन हुआ। समर्थकों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में राजशाही ही देश का समाधान...

International Desk: नेपाल में एक बार फिर राजशाही की वापसी की मांग तेज हो गई है। राजधानी काठमांडू में रविवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। यह रैली मार्च में प्रस्तावित संसदीय चुनावों से पहले आयोजित की गई, जिसे राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। यह प्रदर्शन 2008 में समाप्त हुई राजशाही के बाद पहला बड़ा संगठित शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, खासकर तब जब सितंबर में जनरेशन-Z आंदोलन के बाद एक अंतरिम सरकार बनी और देश में राजनीतिक अस्थिरता गहराई।

 

रैली में शामिल लोग नेपाल के संस्थापक राजा पृथ्वी नारायण शाह की प्रतिमा के आसपास जमा हुए और नारे लगाए “हमें हमारा राजा चाहिए, राजशाही वापस लाओ।” प्रदर्शनकारी सम्राट थापा ने कहा, “जनरेशन-Z आंदोलन के बाद जिस रास्ते पर देश जा रहा है, उसमें राजशाही ही एकमात्र समाधान है। मौजूदा हालात को संभालने के लिए राजा जरूरी हैं।” रविवार का दिन पृथ्वी नारायण शाह की जयंती भी था। बीते वर्षों में इसी दिन होने वाली रैलियां हिंसक हो चुकी हैं। मार्च 2025 में हुई एक रैली में दो लोगों की मौत हुई थी। इस बार दंगा-रोधी पुलिस की भारी तैनाती के कारण प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

 

नेपाल में सितंबर में हुए युवा आंदोलनों ने तत्कालीन सरकार को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। आंदोलन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अवसरों की कमी और खराब शासन व्यवस्था के खिलाफ था। इसके बाद देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। हालांकि, कार्की सरकार पर भ्रष्टाचार मामलों में ढिलाई और निर्णय लेने में देरी के आरोप भी लग रहे हैं, जिससे असंतोष और गहराया है।

 

विश्लेषकों का मानना है कि मार्च चुनाव से पहले राजशाही बनाम गणतंत्र की बहस और तेज होगी। पूर्व शाही परिवार को अब भी नेपाल के बड़े वर्ग का समर्थन हासिल है। यह मुद्दा चुनावी राजनीति को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है। नेपाल एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां भविष्य की शासन व्यवस्था को लेकर देश के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है।

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