Edited By Tanuja,Updated: 03 Mar, 2026 05:29 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों में शामिल न होने के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की आलोचना की और कहा कि वे “मुस्लिम वोटरों को खुश” कर रहे हैं। स्टारमर ने संसद में स्पष्ट किया कि यूके ने केवल रक्षात्मक सहयोग दिया, आक्रामक...
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान पर अमेरिकी हमलों में शामिल न होकर “मुस्लिम वोटरों को खुश करने” की कोशिश की है। ब्रिटिश अखबार The Sun को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह यूके के फैसले से निराश हैं। उन्होंने कहा, “उन्होंने मदद नहीं की। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यूके से ऐसा देखूंगा। हम यूके से प्यार करते हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या स्टारमर राजनीतिक कारणों से मुस्लिम मतदाताओं को साध रहे हैं, तो ट्रंप ने कहा, “हो सकता है।” ट्रंप ने लंदन की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “लंदन बहुत अलग जगह बन गया है। वहां एक खराब मेयर है।” (यह टिप्पणी लंदन के मेयर की ओर इशारा मानी जा रही है।) उनके बयान से अमेरिका और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया है।
स्टारमर का जवाब
ईरान संकट पर हाउस ऑफ कॉमन्स में बयान देते हुए स्टारमर ने कहा यूनाइटेड किंगडम शुरुआती अमेरिकी-इजरायली हमलों में शामिल नहीं था। यह निर्णय जानबूझकर और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया । यूके का मानना है कि क्षेत्र के लिए सबसे बेहतर रास्ता बातचीत है।ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की महत्वाकांक्षा छोड़नी चाहिए। स्टारमर ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने हमारे फैसले से असहमति जताई है, लेकिन मेरा कर्तव्य ब्रिटेन के राष्ट्रीय हित का आकलन करना है और मैं अपने निर्णय पर कायम हूं।” स्टारमर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ब्रिटिश बेस के उपयोग की अनुमति मांगी थी, लेकिन वह केवल “रक्षात्मक उद्देश्य” तक सीमित थी।
उन्होंने कहा ब्रिटिश बेस का उपयोग केवल ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए किया गया qj यूके ने किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लिया।यह कदम सामूहिक आत्मरक्षा और ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित था। बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु ढांचे और नेतृत्व परिसरों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे।